गैंगस्टर लॉरेंस इंटरव्यू केस: 7 पुलिस अधिकारी सस्पेंड, 2 DSP समेत कई लापरवाह शामिल!

गैंगस्टर लॉरेंस के जेल से इंटरव्यू के मामले ने पंजाब सरकार की नींद उड़ा दी है। ऐसे में सरकार ने इस मामले से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) ने 7 अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी के दौरान कोताही और लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया है। राज्य के गृह विभाग के प्रमुख सचिव गुरकीरत कृपाल सिंह ने शुक्रवार की देर शाम इन सभी को सस्पेंड करने का आदेश जारी किया। सस्पेंड किए गए अधिकारियों में DSP से लेकर हेड कॉन्स्टेबल रैंक तक के कई पुलिसकर्मी शामिल हैं।

सस्पेंड होने वालों में DSP गुरशेर सिंह, DSP समर वनीत, सब इंस्पेक्टर रीना (CIA खरड़), सब इंस्पेक्टर जगतपाल जंगू (AGTF), सब इंस्पेक्टर शगनजीत सिंह (AGTF), ASI मुखत्यार सिंह और हेड कॉन्स्टेबल ओम प्रकाश मुख्य रूप से शामिल हैं। इन अधिकारियों पर आरोप था कि उन्होंने जेल में इंटरव्यू के दौरान लॉरेंस के साथ उचित सुरक्षा नहीं बरती और उनकी गतिविधियों पर नियंत्रण नहीं रखा। SIT की रिपोर्ट में बताया गया है कि गैंगस्टर लॉरेंस के दो इंटरव्यू सामने आए हैं, जिनमें से पहला 3 और 4 सितंबर 2023 को हुआ था, जब वह CIA खरड़ में बंद था।

लॉरेंस का पहला इंटरव्यू 14 मार्च 2023 को प्रसारित हुआ, जहां उसने सिद्धू मूसेवाला के हत्या में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। उसने यह भी कहा कि मूसेवाला गैंगवार में उलझ रहा था और उसके कॉलेज के दोस्त विक्की मिड्‌डूखेड़ा की हत्या में भी मूसेवाला का हाथ होने के कारण उसे समाप्त करना जरूरी था। इस इंटरव्यू में बताया गया था कि लॉरेंस ने इसे CIA की कस्टडी से दिया था।

दूसरे इंटरव्यू में लॉरेंस ने यह भी दावा किया कि उसे जेल में मोबाइल फोन आसानी से मिल जाता है और वह रात में गार्डों की कमी का फायदा उठाते हुए कॉल करता है। उसने अपने बैरक का वीडियो भी दिखाया, जिसमें वह अपने संपर्क के बारे में जानकारी देता है। लॉरेंस ने कहा कि मोबाइल उपकरण बाहर से जेल में फेंके जाते हैं और कई बार जेल का स्टाफ उन्हें रोकने में असफल रहता है।

पंजाब पुलिस की ओर से लॉरेंस के इन इंटरव्यू के बाद कई सवाल उठे, जिसके जवाब में राज्य के DGP गौरव यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये इंटरव्यू बठिंडा या पंजाब की किसी जेल से नहीं हुए हैं और लॉरेंस की जो तस्वीरें उन्होंने प्रस्तुत कीं, उनमें उनके हाथ में कोई अनुमति नहीं थी।

इस घटना के चलते पूरे देश में कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं और यह एक बड़ा मामला बन चुका है। सरकार के लिए यह चुनौती है कि वह इस मामले की गहराई से जांच करे और अपने विभाग में सुधार लाने की दिशा में ठोस कदम उठाए। गैंगस्टर लॉरेंस का यह मामला न केवल पुलिस के कानूनी ढांचे पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि यह समाज में कानून के राज की स्थिति को भी चुनौती देता है।