पराली मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई पंजाब सरकार को फटकार, 4 नवंबर सुनवाई!

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की बढ़ती समस्याओं को लेकर गंभीर चिंता जताई है। बुधवार को इस मुद्दे पर हुई सुनवाई के दौरान, न्यायालय ने दोनों राज्यों की सरकारों को कड़ी फटकार लगाई और स्पष्ट किया कि जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। शीर्ष अदालत की ओर से यह बयान दिया गया कि दोनों राज्य सरकारें अपने कर्तव्यों का पालन करने में विफल रही हैं और इस पहलू पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। कोर्ट ने कहा कि यदि मामलों में सही जानकारी नहीं दी गई, तो वह अवमानना नोटिस जारी करने पर विचार करेगी। इसके अलावा, उत्तर भारत में पराली जलाने के मुद्दे को हल करने में केंद्र सरकार की सुस्ती की भी आलोचना की गई है, जो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम को कमजोर कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह पंजाब राज्य द्वारा प्रस्तावित अतिरिक्त धनराशि पर शीघ्र विचार करे। इस धनराशि का उपयोग उन किसानों को सहायता प्रदान करने में किया जाएगा जिनके पास 10 हेक्टेयर से कम भूमि है, ताकि उन्हें ट्रैक्टर और डीजल उपलब्ध कराया जा सके। अदालत ने भारत संघ से पर्यावरण मुआवजे के प्रावधान में नियमों में संशोधन करने के भी आदेश दिए हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वे दो सप्ताह के भीतर सरकार के इस मुद्दे पर पहल की उम्मीद करते हैं, और अगली सुनवाई चार नवंबर को निर्धारित की गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकारों पर पराली जलाने के मामलों में कोई कार्रवाई न करने पर सख्त नाराजगी व्यक्त की है। अदालत ने कहा कि अगर सरकारें सच में कानून के कार्यान्वयन के लिए गंभीर हैं, तो उन्हें कम से कम एक मुकदमा दर्ज करना चाहिए। पंजाब के मुख्य सचिव को बताया गया कि 1080 उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, लेकिन केवल 473 लोगों से जुर्माना लिया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि सरकार उल्लंघनकर्ताओं को कोई गंभीर चेतावनी नहीं दे रही है, और यह हालात पिछले तीन सालों से चल रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद, पंजाब सरकार ने भी सक्रियता दिखाई है। प्रशासनिक अधिकारियों को फील्ड में भेजा गया है, जो लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ आग बुझाने के प्रयास कर रहे हैं। सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने मिलकर 522 संयुक्त दौरे किए हैं, और संभवतः इस दौरान 2504 जन जागरूकता बैठकें आयोजित की गईं। इसके अतिरिक्त, 874 पराली जलाने के मामलों में पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और अब तक 10.55 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

इस मुद्दे पर राजनीतिक हलचल भी बढ़ चुकी है। आम आदमी पार्टी के यूथ विंग ने इस विषय में एक पोस्ट साझा की है, जिसमें बताया गया है कि बीजेपी शासित राज्यों में पराली जलाने के मामलों में इजाफा हुआ है। हरियाणा में 23 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 71 प्रतिशत मामलों में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। इसके विपरीत, पंजाब में आम आदमी पार्टी के नेतृत्व में पराली जलाने के 27 प्रतिशत मामलों में कमी आई है। कुल मिलाकर, यह मुद्दा न केवल पर्यावरण के लिए गंभीर है, बल्कि इससे जुड़ी राजनीतिक गतिविधियाँ भी ध्यान आकर्षित कर रही हैं।