पंजाब AAP विधायक का अपमान: स्कूल में नजरअंदाज, स्पीकर ने जारी किया नोटिस!
पंजाब के फरीदकोट जिले के जैतो से आम आदमी पार्टी के विधायक अमोलक सिंह के एक सरकारी स्कूल में सम्मान न मिलने का मामला बहस का विषय बन गया है। विधायक अमोलक सिंह, जो कि 17 सितंबर को गोदारा स्थित सरकारी प्राइमरी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे थे, वहां उन्होंने विवादास्पद स्थिति का सामना किया। उन्हें न तो स्कूल के शिक्षकों द्वारा रिसीव किया गया, न ही टीचर्स अपने कक्षों से बाहर आए। इस घटने के बाद मामला विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां तक पहुंचा, जिन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए तीन शिक्षकाओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
विधायक ने बताया कि स्कूल के हेड टीचर हरविंदर सिंह उस दिन गैरहाजिर थे, जबकि अन्य तीन शिक्षक, जिनमें परमजीत कौर, गीता रानी और कुलविदंर कौर शामिल थीं, ड्यूटी पर उपस्थित थीं। विधायक ने आरोप लगाया कि स्कूल का स्टाफ उनके आगमन पर अनुपस्थित रहा और इस कारण उन्हें कोई सम्मान नहीं दिया गया। विधायक के इस पत्र के बाद स्पीकर ने मामले की जांच करते हुए संबंधित शिक्षकों को विधानसभा में बुलाया। यह पहल स्पष्ट करती है कि विधायकों को सम्मान नहीं देने की घटनाएं अब सीनियर अधिकारियों से नीचे की स्तर पर भी बढ़ती जा रही हैं।
इससे पहले, अधिकतर मामलों में यही सुनने को मिलता था कि सीनियर सरकारी अधिकारी विधायकों का सम्मान नहीं करते। इन घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए कई बार सीनियर अधिकारियों को विधानसभा में तलब किया गया था। हालांकि, इस प्रकार का मामला जहां विधायक को सम्मान न मिले, विशेष रूप से शिक्षण संस्थानों में, यह पहली बार देखा गया है। इस प्रकरण ने शिक्षा विभाग में अनुशासन और सम्मान की अनुपस्थिति को उजागर किया है और यह सवाल उठाया है कि क्या सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक माहौल सही ढंग से चल रहा है।
विधानसभा स्पीकर संधवां ने जिला शिक्षा अधिकारी को भी इस मामले में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह स्थिति न केवल विधायक और शिक्षकों के बीच संबंधों को प्रभावित करती है, बल्कि यह शिक्षा प्रणाली में मौलिक बदलाव की आवश्यकता को भी दर्शाती है। ऐसे मामलों का समाधान होना बहुत जरूरी है ताकि आगे चलकर इस तरह की घटनाएं न हों, जिससे न केवल शिक्षकों की बल्कि विधायकों की भूमिका भी स्पष्ट हो सके।
सारांश के तौर पर, यह मामला सरकारी स्कूलों में अनुशासन और सम्मान को लेकर एक बड़ा संकेत दे रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में ऐसी घटनाएं न केवल विधायक की स्थिति को कमजोर करती हैं, बल्कि समाज में शिक्षा के प्रति गंभीरता पर भी सवाल उठाती हैं। सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और सुनिश्चित करना चाहिए कि स्कूलों में सभी को उचित सम्मान मिले।









