क्या जालंधर की प्रदूषित हवा बढ़ाएगी दिवाली के बाद ठंड का कहर?
पंजाब और चंडीगढ़ में मानसून का विदाई का वक्त आते ही ठंड का अहसास होना शुरू हो गया है। दिवाली के बाद मौसम में ठंडक तेजी से बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इस बीच, मौसम विभाग ने 24 अक्टूबर तक बारिश या आंधी का कोई अलर्ट जारी नहीं किया है, जिससे यह साफ होता है कि वर्तमान में मौसम खुशगवार रहेगा। दिन के समय धूप और साफ मौसम के चलते अधिकतम तापमान में 0.6 डिग्री की वृद्धि देखी गई है, जो सामान्य स्तर के बहुत करीब पहुँच चुका है। बठिंडा में तापमान सबसे ज्यादा 35.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि चंडीगढ़ में भी पिछले 24 घंटे में तापमान 0.6 डिग्री बढ़कर 33.7 डिग्री पर पहुंच गया है।
हालांकि, मौसम में बदलाव के साथ साथ, जालंधर सहित अन्य शहरों में वायु प्रदूषण की समस्या एक बार फिर गंभीर दिखाई दे रही है। खास तौर पर पराली जलाने के कारण प्रदूषण के स्तर में वृद्धि हुई है। पिछले 24 घंटों में यह समस्या और गंभीर हो गई है, अधिकांश शहरों में प्रदूषण का स्तर 100 एक्यूआई तक पहुँच गया है। जालंधर में एक्यूआई 152, पटियाला में 140, लुधियाना में 140 और अमृतसर में 142 दर्ज किया गया है, जबकि पठानकोट का एक्यूआई 86 है, जो कि अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में है।
प्रदूषण के इस बढ़ते स्तर के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी अंदेशा बढ़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, सांस लेने में दिक्कतें होने की संभावना व्यक्त की जा रही है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से ही श्वसन समस्याओं का सामना कर रहे हैं। इसके चलते, मौसम विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे जब भी बाहर निकलें, तो मास्क का इस्तेमाल करें और यथासंभव प्रदूषित क्षेत्रों से दूर रहें।
इस मौसमी परिवर्तनों के बीच, स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण विशेषज्ञों ने पराली जलाने की समस्या को हल करने के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही है। यदि इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता और भी खराब हो सकती है, जो जीवन के लिए खतरा बन सकता है। इस दिशा में जागरूकता फैलाना और उचित नीतियों का निर्माण जरुरी है, ताकि इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सके।









