बठिंडा-बरनाला रेल लाइन बंद: किसानों का मोगा हाईवे पर रोषवाट, सरकार विरोधी नारे!

बरनाला जिले में धान की खरीद के संदर्भ में किसान संगठनों द्वारा विभिन्न स्थानों पर धरने का आयोजन किया जा रहा है। भारतीय किसान यूनियन उगराहां ने बरनाला रेलवे स्टेशन पर बरनाला-बठिंडा रेलवे ट्रैक को बाधित कर दिया है। इसके अलावा, अन्य किसान संगठनों जैसे बीकेयू कादियां, बीकेयू डकौंडा, बीकेयू राजेवाल आदि ने लुधियाना रोड पर महल कलां, मोगा हाईवे पर पकखो कैंचियां और चंडीगढ़ रोड पर बरनाला बाइपास पर भी धरना प्रदर्शन किया है। इन आयोजनों में आढ़ती और शेलर मालिकों के प्रतिनिधि भी सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं।

किसान नेताओं का कहना है कि यह विरोध प्रदर्शन पंजाब और केंद्र सरकार द्वारा धान की खरीद की अव्यवस्था के खिलाफ किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि 1 अक्टूबर से धान की खरीद प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन 13 दिन का समय बीत जाने के बाद भी सरकार ने खरीद की व्यवस्थाएं पूरी नहीं की हैं। इसके चलते किसानों, आढ़तियों और शेलर मालिकों को धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ा है। यदि आगामी दिनों में यह समस्या का समाधान नहीं निकाला गया तो किसान संगठनों का संघर्ष और भी तेज हो जाएगा।

इस प्रदर्शन में शामिल शेलर संगठनों के नेता नवनीत कुमार और विजय कुमार ने बताया कि उनकी मांगों को लेकर सरकार के साथ कई बार चर्चा की जा चुकी है, लेकिन अब तक समाधान का कोई रास्ता नहीं निकल सका है। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार पुराने धान को सेलरी (कृषि उपज विपणन निगम) से हटाने में असमर्थ रही है, जिससे किसानों की समस्याएं और बढ़ गई हैं। ऐसे में वे अपनी मांगों को लेकर एकजुट होकर सड़कों पर आ गए हैं।

धरने का उद्देश्य केवल अपनी आवाज उठाना नहीं है, बल्कि यह एक संगठित संघर्ष का हिस्सा है जिसमें किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठाई जा रही है। किसान संगठनों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर आगे भी प्रदर्शन करते रहेंगे और सरकार से उचित समाधान की आस लगा रखेंगे। अगर उनकी समस्याओं को तत्काल नहीं सुलझाया गया, तो वे अपने आंदोलन को और भी सशक्त बनाएंगे।

इस स्थिति ने सरकारी अधिकारियों तथा उन सभी संबंधित पक्षों को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि जब किसान ही अपनी उपज के लिए परेशान होंगे, तो इसका प्रभाव पूरे कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा। किसानों और संबंधित संगठन सरकार से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं ताकि स्थिति का जल्दी समाधान किया जा सके और अगली फसल की खरीद प्रक्रिया में कोई बाधा उत्पन्न न हो। उनका मुख्य उद्देश्य है कि किसी भी किसान को अपनी मेहनत की उचित कीमत ना मिलने पाए, और वे अपनी उपज बेहतरीन तरीके से मंडियों में बेच सकें।