पंचायत चुनाव: बीएलओ ने ड्यूटी पर किया विरोध, रिहर्सल में जताई नाराज़गी!
लुधियाना जिले के जगरांव में पंचायत चुनाव के समापन से पहले, आर्थिक और प्रशासनिक चुनौतियों के चलते बूथ स्तर अधिकारियों (बीएलओ) ने अपनी ड्यूटी को लेकर कुछ गंभीर विरोध जताया है। हाल ही में स्थानीय डीएवी कॉलेज में पंचायत चुनाव की पहली रिहर्सल आयोजित की गई, जहां बीएलओ ने धरना देकर अपनी नाराजगी प्रकट की। उनका आरोप है कि सरकार ने उन्हें वोट बनाने और काटने की ड्यूटी पर लगा रखा है, लेकिन अब उनकी जिम्मेदारियों में वोट डालवाने की ड्यूटी भी जोड़कर उन्हें और अधिक परेशान किया जा रहा है।
इस घटनाक्रम में गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों की भी भागीदारी अत्यधिक महत्वपूर्ण रही है। सरकारी कॉलेजों के गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों को भी पंचायत चुनाव में ड्यूटी के लिए बुलाया गया है। इससे शिक्षकों के संघ से जुड़े नेताओं ने कार्यालय के अधिकारियों से मुलाकात की और एक पत्र सौंपा। पत्र में हाईकोर्ट के आदेश की एक प्रति भी शामिल की गई है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों को चुनावी ड्यूटी पर नहीं लगाया जाना चाहिए।
पंचायत चुनाव की रिहर्सल के दौरान, 198 बीएलओ ने उपजिलाधिकारी को एक संगठित मांग पत्र प्रस्तुत किया। इस पत्र पर प्रमुख बीएलओ जैसे परमिंदर सिंह, जसपाल सिंह और इंदरप्रीत सिंह के हस्ताक्षर थे। ऐसे अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि लोकसभा चुनाव से लेकर शिरोमणि कमेटी चुनाव तक उनकी ड्यूटी लगातार लगाई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिरोमणि कमेटी की ओर से वोट बनाने और डालने की ड्यूटी 31 अक्टूबर तक जारी रहेगी, जिससे उनके काम का बोझ आसमान छू रहा है।
बीएलओ का एक बड़ा हिस्सा यह चाहता है कि पंचायत चुनाव में उन्हें वोट डालवाने की ड्यूटी से छूट मिले ताकि वे अपनी नियमित जिम्मेदारियों पर ध्यान केंद्रित कर सकें। उनका कहना है कि वे एक दिन की ड्यूटी से पीछे नहीं हटते, लेकिन चुनावी काम में मौजूद कष्टों को देखते हुए, ड्यूटी हटाई जानी चाहिए। इसके अलावा, स्कूलों को तीन दिन की छुट्टी देने की मांग भी की गई है ताकि वे चुनावी कार्यों में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।
इसी क्रम में, सरकारी कॉलेजों के गेस्ट फैकल्टी शिक्षकों को भी रिहर्सल के लिए बुलाया गया था, लेकिन उनकी यूनियन ने इस कदम का जोरदार विरोध किया है। इस स्थिति ने स्थिति को और जटिल बना दिया है, जिससे अधिकारियों के सामने विवादास्पद प्रश्न उठ खड़े हुए हैं कि इन चुनावी कार्यों को कैसे संभाला जाएगा। सभी पक्षों की मांग अब यही है कि उनकी चिंताओं का विधिपूर्वक समाधान किया जाए ताकि वे संविधानिक दायित्वों का निर्वहन सही दिशा में कर सकें।









