बठिंडा में निगम की टो वैन के खिलाफ व्यापारियों का हंगामा: धरने का एलान!
बठिंडा शहर में 12 अगस्त से बंद पड़ी टो वैन को फिर से चालू करने के लिए नगर निगम के प्रयासों का व्यापार मंडल और सामाजिक संस्थानों द्वारा विरोध किया जा रहा है। इस विरोध के तहत, आज बठिंडा में दुकानदारों ने अपने व्यवसाय बंद करके नगर निगम के बाहर एक जोरदार प्रदर्शन किया। आरोप है कि निगम अधिकारियों के निर्देश पर, ठेकेदार के कर्मचारियों को टो वैन के साथ बाजारों में भ्रमण करने के लिए लगाया जा रहा है, जिससे सड़क के पीली पट्टी के बाहर खड़ी गाड़ियों को टो किया जा रहा है। इस कार्रवाई के प्रति असंतोष व्यक्त करते हुए, दुकानदार और व्यापार मंडल के अधिकारी निगम के बाहर एकत्रित होकर टो वैन के खिलाफ नारेबाजी प्रारंभ कर दी।
व्यापारियों का कहना है कि निगम की यह कार्रवाई पूरी तरह से धक्केशाही है। समाजसेवी सोनू माहेश्वरी ने इस मुद्दे पर कांग्रेसियों के साथ मिलकर कहा कि निगम ने बार-बार व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें की हैं। हर बार यह कहा गया कि टो वैन को बंद किया जाए और ठेकेदार के ठेके में कमी लाई जाए। अगर टो वैन चलानी है, तो यह काम ट्रैफिक पुलिस को करना चाहिए, न कि निगम या ठेकेदारों को। पिछले हफ्ते एक गठित समिति ने आश्वासन दिया था कि वह व्यापार मंडल की सहमति के बाद ही कोई निर्णय लेंगे, लेकिन नवरात्रि का त्योहार शुरू होते ही निगम ने टो वैन चलाना शुरू कर दिया है, जिससे व्यापारियों में आक्रोश व्याप्त है।
कामकाजी वातावरण पर टो वैन के सक्रिय होने का सीधा असर पड़ रहा है। जुर्माने के डर के कारण, ग्राहक बाजारों में आना बंद कर रहे हैं। व्यापारियों और दुकानदारों को विशेष रूप से त्योहारों के मौसम में अधिक बिक्री और व्यापार की उम्मीद रहती है। लेकिन, यदि टो वैन चलती रही, तो ग्राहक खरीदारी करने नहीं आएंगे। व्यापार मंडल के प्रमुख अमित कपूर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार और नगर निगम ने इस तरह जबरदस्ती टो वैन को चलाने का निर्णय लिया, तो सभी व्यापारी अपनी दुकानें बंद कर चाबियां निगम को सौंप देंगे। उन्होंने कहा कि व्यापारी किसी भी स्थिति में टो वैन को बाजार में चलने नहीं देंगे।
इस पूरे मामले को देखते हुए, व्यापारी वर्ग के रोष की गंभीरता को समझना आवश्यक है। अगर सरकार और नगर निगम इन चिंताओं को नजरअंदाज करते रहे, तो निश्चित रूप से व्यापारी वर्ग और निगम के बीच संबंध और भी बिगड़ सकते हैं, जिससे बठिंडा के व्यापार पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। भविष्य में, यदि सही कदम नहीं उठाए गए, तो बाजार की गतिविधियों पर भारी असर पड़ेगा, जो कि समाज और नगर निगम के लिए अच्छा संकेत नहीं होगा।









