सोनीपत: निरंकारी संत समागम के बाद 126 जोड़े विवाह बंधन में बंधे
ने नए जीवन की शुरुआत की और सुखमय दांपत्य जीवन का आशीर्वाद प्राप्त किया।
की शुरुआत पारंपरिक जयमाला और निरंकारी सांझा-हार की रस्म से हुई। मिशन की प्रधान राजकुमारी
और अन्य कार्यकारिणी सदस्यों ने नवविवाहित जोड़ों को हार पहनाकर उनके सुखी जीवन की
कामना की। इसके बाद हिंदी में निरंकारी लावों का गायन किया गया। इनमें पति-पत्नी के
बीच विश्वास, सम्मान और समर्पण के साथ गृहस्थ जीवन बिताने का संदेश दिया गया। अंत में
सतगुरु माता सुदीक्षा महाराज और निरंकारी राजपिता रमित ने नवविवाहित जोड़ों पर
माता सुदीक्षा महाराज ने कहा कि सामूहिक विवाह का उद्देश्य केवल एक आयोजन तक सीमित
नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसके मूल्यों को जीवन में अपनाना चाहिए। पति-पत्नी को एक-दूसरे
की जिम्मेदारियां समझते हुए प्रेम, विश्वास और तालमेल के साथ आगे बढ़ना चाहिए। दोनों
को एक-दूसरे का सहारा बनकर जीवन की हर परिस्थिति का सामना करना चाहिए। उन्होंने कहा
कि पति-पत्नी सेवा, सुमिरन और सत्संग के मार्ग पर एक-दूसरे का सहयोग करें और आगे बढ़ने
के लिए प्रोत्साहित करें। विवाह ऐसा रिश्ता है, जिसे जीवनभर प्रेम, आदर और समर्पण के
साथ निभाना चाहिए। दोनों परिवारों के बीच आपसी सम्मान और स्नेह से यह रिश्ता और मजबूत
बनता है। उन्होंने एक-दूसरे की कमियों को सहजता से स्वीकार करने, क्षमा करने और विनम्रता
बनाए रखने की सीख भी दी। इस सामूहिक विवाह समारोह में सतगुरु माता जी के परिवार के
निरंकारी मंडल के सचिव जोगिन्दर सुखीजा ने बताया कि समाज कल्याण विभाग के सहयोग से
आयोजित समारोह में विश्व के चार राष्ट्रों देश के विभिन्न 16 राज्यों से आए जोड़ों
उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के जोड़े शामिल रहे। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड
बताया कि अलग-अलग राज्यों, भाषाओं और संस्कृतियों से आए 126 जोड़ों का एक साथ विवाह
बंधन में बंधना एकता, समानता और भाईचारे का संदेश देता है। समारोह में सादगी और मानवीय
मूल्यों को महत्व देते हुए नवदंपतियों को प्रेम, विश्वास और आपसी सहयोग के साथ जीवन










