जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग खारिज
नई दिल्ली, 09 अक्टूबर । उच्चतम न्यायालय ने आज उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें जुलाई में जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने के लिए केंद्र, दिल्ली सरकार और पुलिस को निर्देश देने की मांग की गई थी। इसके साथ ही न्यायालय ने उस मांग को भी खारिज कर दिया, जिसमें कानून-व्यस्था बनाए रखने और अपराधों की जांच के मामले में पुलिस को भी न्यायपालिका की तर्ज पर संप्रभु और स्वतंत्र घोषित किये जाने का अनुरोध किया गया था।
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि ये छात्र हैं और इनके भविष्य को देखते हुए हमें कड़े फैसले लेने से बचना चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस मामले पर सुनवाई के दौरान साफ किया कि यह याचिका संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत प्रदत्त विशेष शक्तियों का उपयोग करके छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद्द करने के शीर्ष न्यायालय के पहले के आदेश की समीक्षा कराने की एक अप्रत्यक्ष कोशिश है। न्यायालय ने अनुच्छेद 142 के प्रयोग का बचाव करते हुए कहा कि इसकी कोई गारंटी नहीं है कि न्यायालय हमेशा शत-प्रतिशत सही आदेश पारित करे। न्यायालय ने कहा कि प्रदर्शनकारी युवा छात्र थे और उन्हें बार-बार न्यायालय कचहरी के चक्कर न लगाने पड़ें, इसलिए उनके भविष्य और परिवारों की स्थिति को ध्यान में रखा गया।
न्यायालय ने इस मामले में हिमाचल प्रदेश के एक पुराने मामले का जिक्र करते हुए कहा कि उस मामले में प्रदर्शनकारियों को राहत देने से मना किया था लेकिन उच्चतम न्यायालय ने दखल दिया क्योंकि प्रदर्शनकारी कोई आदतन या पेशेवर नहीं थे। सीजेआई ने कहा कि उस समय कोरोना महामारी जैसे अभूतपूर्व संकट के दौर में देश इस प्रकार की परिस्थितियों के लिए तैयार नहीं था। इसलिए लोगों उस कठिन दौर में अपने तरीके से प्रतिक्रिया दी।










