मप्र के सागर के जहरीली शराब मामले में हुई 20 मौतें, 32 आरोपित गिरफ्तार, हाईकोर्ट में सरकार ने पेश किया जवाब
जबलपुर, 22 सितम्बर । मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा तहसील में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों के मामले को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर मंगलवार को उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार ने सात बिंदुओं पर अपना जवाब पेश किया। न्यायालय को बताया कि जहरीली शराब से 20 लोगों की मौत हुई है। मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है।
सरकार ने अदालत को बताया कि शराबकांड की न्यायिक जांच के लिए आयोग गठित किया गया है। न्यायमूर्ति वीपीएस चौहान की अध्यक्षता में गठित आयोग पूरे मामले की जांच करेगा। सरकार के मुताबिक, तीन एफआईआर में अब तक 52 लोगों को आरोपित बनाया है, जिनमें से 32 की गिरफ्तारी हो चुकी है। प्रकरणों की जांच जारी है और अवैध तथा मिलावटी शराब के खिलाफ विशेष अभियान भी चलाया जा रहा है। सरकार ने अदालत को अब तक की कार्रवाई की विस्तार से जानकारी दी।
गौरतलब है कि हाल ही में सागर जिले के बंडा और शाहगढ़ तहसील क्षेत्र में कथित जहरीली शराब पीने से कई लोगों की मौत हो गई थी। मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर दमोह निवासी सामाजिक कार्यकर्ता वैभव सिंह ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की थी। इसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच की मांग के साथ सागर कलेक्टर और एसपी को हटाने की मांग भी की गई थी। याचिका में बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र में कथित मिलावटी शराब के नेटवर्क तथा प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही के आरोप भी उठाए गए थे।
उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने मंगलवार को याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता वैभव सिंह ने अदालत में कहा कि पुलिस-प्रशासन 20 लोगों की मौत की बात कह रहा है, जबकि मीडिया रिपोर्ट्स में 30 से 40 लोगों की मौत की बात सामने आ रही है। उन्होंने मुआवजे के तौर पर दिए गए 4-4 लाख रुपये पर भी सवाल उठाया। याचिकाकर्ता ने कहा कि सरकार यह बताए कि मुआवजा किस आधार पर दिया गया है। वैभव सिंह ने जहरीली शराबकांड के लिए सागर एसपी और कलेक्टर को जिम्मेदार ठहराया।
सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय ने कहा कि याचिका में उठाई गई प्रमुख मांगों के संबंध में शासन की ओर से कार्रवाई की जा चुकी है। न्यायिक जांच के लिए आयोग का गठन हो चुका है और मामले की जांच उसके समक्ष जारी रहेगी। इसके बाद न्यायालय ने सामाजिक कार्यकर्ता वैभव सिंह की जनहित याचिका का निराकरण कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देशित किया कि शराबकांड से संबंधित तथ्य, दस्तावेज और अन्य सामग्री न्यायिक जांच आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें। युगलपीठ ने यह स्वतंत्रता भी दी कि यदि आयोग के समक्ष उनके पक्ष पर सुनवाई नहीं होती या कोई नया आधार उत्पन्न होता है तो वे पुनः उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं। याचिकाकर्ता वैभव सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अगर आयोग के सामने भी सुनवाई नहीं हुई तो वे उच्च न्यायालय जाएंगे।









