आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित
जयपुर/बीकानेर, 08 अगस्त । आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के प्रभावी क्रियान्वयन एवं आमजन तक इसकी पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रशिक्षण संस्थान (एसआईएचएफडब्ल्यू), जयपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।
बीकानेर सीएमएचओ डॉ पुखराज साध ने बताया कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के विभिन्न घटकों की सही एवं सटीक जानकारी आमजन तक पहुंचाना तथा प्रत्येक नागरिक, प्रत्येक स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं प्रत्येक स्वास्थ्य संस्थान को डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ते हुए पेपरलेस एवं एकीकृत स्वास्थ्य सेवा तंत्र को मजबूत बनाना रहा। कार्यशाला में प्रदेश के समस्त जिलों के जिला आईईसी समन्वयक, मां योजना समन्वयक तथा सूचना प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ के कार्मिकों ने भाग लिया। बीकानेर जिले का प्रतिनिधित्व जिला आईईसी समन्वयक मालकोश आचार्य ने किया।
कार्यशाला की अध्यक्षता करते हुए सहायक निदेशक (आईईसी) सीमा तिवारी ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन केवल एक तकनीकी पहल नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी एवं आमजन के अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सभी जिलों से सोशल मीडिया एवं अन्य संचार माध्यमों का प्रभावी उपयोग करते हुए मिशन को जन-जन तक पहुंचाने तथा इसे जन-आंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया।
राज्य आईटी सेल के नोडल अधिकारी डॉ. एस.एल. गुप्ता, एसीपी विष्णुकांत जालेंद्र एवं पिंकी बूलचंदानी द्वारा आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के विभिन्न घटकों की विस्तृत जानकारी दी गई। वहीं नेशनल हेल्थ अथॉरिटी, भारत सरकार के विशेषज्ञ रजनीश गर्ग एवं विधि ने मिशन की तकनीकी व्यवस्थाओं, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं तथा आमजन तक इनके लाभ प्रभावी ढंग से पहुंचाने के संबंध में प्रशिक्षण दिया। कार्यशाला में राज्य आईईसी प्रकोष्ठ के सलाहकार पूर्णम विवेदी, देवनायक जोशी एवं अमित गर्ग भी उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण के दौरान एसीपी विष्णुकांत जालेंद्र ने आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा आईडी), पर्सनल हेल्थ रिकॉर्ड (पीएचआर) ऐप्स, आरोग्य सेतु 2.0, पेटीएम एवं आभा एप के माध्यम से उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आभा आईडी के माध्यम से नागरिक अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से सुरक्षित रख सकते हैं तथा अपनी अनुमति से किसी भी चिकित्सक या स्वास्थ्य संस्थान के साथ साझा कर सकते हैं। इससे स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेजों की हार्ड कॉपी साथ रखने की आवश्यकता भी काफी कम हो जाती है।
कार्यशाला में बताया गया कि सरकारी अस्पतालों में उपलब्ध क्यूआर कोड के माध्यम से आभा आईडी का उपयोग कर मरीज बिना लंबी कतार में लगे शीघ्र पंजीयन एवं ओपीडी पर्ची प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही निजी अस्पतालों, प्रयोगशालाओं एवं फार्मेसियों को भी आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन से जोड़ने तथा हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री (एचपीआर-आईडी) एवं हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री (एचएफआर-आईडी) के महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।
एसीपी विष्णुकांत जालेंद्र ने डिजिटल हेल्थ इंसेंटिव स्कीम (डीएचआईएस) की जानकारी देते हुए बताया कि एबीडीएम अनुरूप सॉफ्टवेयर का उपयोग करने वाले सरकारी एवं निजी अस्पताल, प्रयोगशालाएं एवं फार्मेसियां आभा आईडी के माध्यम से प्रत्येक डिजिटल स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने पर प्रोत्साहन राशि प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश के अनेक स्वास्थ्य संस्थान इस योजना के माध्यम से लाखों रुपये का प्रोत्साहन प्राप्त कर चुके हैं, जिससे डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को और अधिक गति मिल रही है।









