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बलरामपुर : मातृ-शिशु स्वास्थ्य और बाल संरक्षण पर जिला स्तरीय कार्यशाला

बलरामपुर, 10 जुलाई । बलरामपुर में मातृ-शिशु स्वास्थ्य, बाल संरक्षण और सामाजिक कुरीतियों की रोकथाम को लेकर जिला स्तरीय संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और पंचायत प्रतिनिधियों को समुदाय में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने तथा बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगाने में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया गया।

कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देशन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय सिंह के मार्गदर्शन में जिले में जिला स्तरीय स्व-सहायता समूह संवेदीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाना, बच्चों में गैर-संचारी रोगों के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा बाल विवाह और भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों पर रोक लगाने के लिए समुदाय को जागरूक करना था।

कार्यशाला में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को बताया गया कि वे अपने गांवों में स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी सही जानकारी पहुंचाकर मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने, कुपोषण घटाने और बाल विवाह जैसी सामाजिक समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

विशेषज्ञों ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, किशोरावस्था में गर्भधारण के जोखिम, असुरक्षित गर्भपात के दुष्परिणाम, लिंग चयन जांच निषेध कानून, भ्रूण हत्या की कानूनी स्थिति तथा बच्चों में गैर-संचारी रोगों की पहचान और रोकथाम पर विस्तार से जानकारी दी। महिलाओं से शासन की स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने की अपील भी की गई।

कार्यक्रम में जनपद पंचायत बलरामपुर की अध्यक्ष सुमित्रा चेरवा, पंचायत प्रतिनिधियों और स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई तथा गांव-गांव में स्वास्थ्य जागरूकता अभियान चलाने का संकल्प लिया।

इसी क्रम में जिला स्वास्थ्य विभाग ने यूनिसेफ और एमसीसीआर ट्रस्ट के सहयोग से पंचायत प्रतिनिधियों के लिए भी विशेष उन्मुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें जिले की विभिन्न ग्राम पंचायतों के लगभग 94 जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।

प्रशिक्षण के दौरान बाल विवाह के दुष्परिणाम, किशोर स्वास्थ्य, एनीमिया नियंत्रण, संतुलित पोषण, गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, संस्थागत प्रसव, पूर्ण टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी दी गई। साथ ही बच्चों में सिकल सेल रोग, बाल मधुमेह और जन्मजात हृदय रोग जैसे गैर-संचारी रोगों की समय पर पहचान और उपचार के महत्व पर भी चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने बताया कि पंचायत प्रतिनिधि ग्राम सभाओं और जनसंपर्क के माध्यम से बाल विवाह रोकने, किशोरियों की शिक्षा और पोषण को बढ़ावा देने, गर्भवती महिलाओं को समय पर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने तथा बच्चों में गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम के अंत में सभी पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने-अपने गांवों में बाल विवाह मुक्त समाज, स्वस्थ मातृ-शिशु, सशक्त किशोर-किशोरियों और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जनजागरूकता अभियान चलाने का सामूहिक संकल्प लिया।