सर्पदंश से बचाव एवं नियंत्रण के लिए समन्वित प्रयासों पर बल, राज्य स्तरीय बैठक आयोजित
धर्मशाला, 04 जुलाई । सर्पदंश की रोकथाम, जागरूकता, त्वरित उपचार एवं प्रभावी नियंत्रण के लिए सभी संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर शनिवार को धर्मशाला में आयोजित राज्य स्तरीय हितधारक परामर्श बैठक में जोर दिया गया। बैठक का आयोजन राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, हिमाचल प्रदेश तथा भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के ‘सर्पा’ परियोजना के संयुक्त तत्वावधान में किया गया, जिसमें सर्पदंश विषाक्तता की रोकथाम एवं नियंत्रण हेतु राज्य कार्ययोजना को अंतिम रूप देने पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक की अध्यक्षता विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्पदंश नियंत्रण विशेषज्ञ एवं आईसीएमआर की सर्पा परियोजना के राष्ट्रीय प्रधान अन्वेषक डॉ. जयदीप सी. मेनन ने की। उन्होंने विभिन्न राज्यों के अनुभव साझा करते हुए सर्पदंश को केवल स्वास्थ्य विभाग का विषय न मानकर सामाजिक एवं बहु-विभागीय चुनौती बताया।
बैठक में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, वन, कृषि, पशुपालन, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, ग्रामीण विकास, पंचायती राज, शिक्षा विभाग, नागरिक संगठनों तथा कांगड़ा एवं चंबा के स्नेक रेस्क्यू स्वयंसेवकों सहित विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
एनएचएम के उपनिदेशक एवं सर्पदंश विशेषज्ञ डॉ. ओमेश भारती ने सर्पदंश की वर्तमान स्थिति, राज्य कार्ययोजना का प्रारूप तथा विभिन्न विभागों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में सर्पदंश को अधिसूचित रोग घोषित किए जाने से सटीक आंकड़े उपलब्ध होंगे, जिससे बेहतर योजना एवं प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने कहा कि प्रत्येक वर्ष 19 सितंबर को मनाए जाने वाले सर्पदंश जागरूकता दिवस के अवसर पर शैक्षणिक संस्थानों में प्रश्नोत्तरी एवं जागरूकता गतिविधियों का आयोजन कर युवाओं में इस विषय के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाएगी।









