तेतुलिया जमीन अवैध कब्जा मामले में हाई कोर्ट ने पुनीत अग्रवाल को दी अंतरिम राहत, ट्रायल पर लगाई रोक
रांची, 15 जुलाई । बोकारो जिले के चास प्रखंड स्थित तेतुलिया गांव की 103 एकड़ भूमि पर अवैध कब्जा और फर्जी जमाबंदी से जुड़े बहुचर्चित मामले में झारखंड उच्च न्यायालय ने व्यवसायी पुनीत कुमार अग्रवाल को अंतरिम राहत दी है। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने निचली अदालत में चल रही ट्रायल की कार्रवाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। साथ ही मामले में राज्य सरकार से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
पुनीत कुमार अग्रवाल ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर निचली अदालत द्वारा उनके विरुद्ध आरोप गठन के आदेश को चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले पर विचार करते हुए ट्रायल की आगे की कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया।
मामले में सीआईडी ने कांड संख्या 4/2025 दर्ज किया है। जांच पूरी होने के बाद निचली अदालत में आरोपितों के खिलाफ आरोप गठन किया जा चुका है। आरोप है कि वर्ष 2012 में तेतुलिया गांव की 103 एकड़ जमीन की फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध रूप से जमाबंदी कर दी गई थी।
जांच में तत्कालीन अंचल अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर राज्य सरकार ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था। इस कथित फर्जीवाड़े में तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), भूमि सुधार उपसमाहर्ता (डीएलआरओ), अंचल निरीक्षक, राजस्व कर्मचारी और अमीन की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है। इन अधिकारियों पर भी गंभीर अनियमितताओं और मिलीभगत के आरोप लगाए गए हैं।
बताया जाता है कि सतनपुर और तेतुलिया क्षेत्र की पहाड़ एवं वन भूमि राज्य सरकार ने पूर्व में बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) को आवंटित की थी। हालांकि, बीएसएल द्वारा इस भूमि का उपयोग नहीं किए जाने के कारण यह लंबे समय तक खाली पड़ी रही। वर्ष 1980 और 2013 में प्रकाशित रिवीजनल सर्वे के दौरान भी इस जमीन पर किसी व्यक्ति ने स्वामित्व या दावे का कोई आवेदन प्रस्तुत नहीं किया था।
इसके बावजूद वर्ष 2012 में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 103 एकड़ भूमि की जमाबंदी कर दी गई। मामला सामने आने के बाद राज्य सरकार ने जांच कराई, जिसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की पुष्टि होने पर संबंधित अंचल अधिकारी को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। इसके बाद सीआईडी ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू की, जो अब न्यायिक प्रक्रिया में है।
उच्च न्यायालय के ताजा आदेश के बाद फिलहाल निचली अदालत में इस मामले की सुनवाई अगले आदेश तक स्थगित रहेगी। अब राज्य सरकार के जवाब के बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी।————-









