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शकुन्तला मिश्रा विश्वविद्यालय के दिव्यांग विद्यार्थियों ने अर्जित किए 45 पदक

लखनऊ, 31 जुलाई । लखनऊ स्थित डॉ. शकुन्तला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ का 13वाँ दीक्षांत समारोह राज्यपाल के प्रतिनिधि के रूप में विशेष कार्याधिकारी डॉ. सुधीर महादेव बोबडे की उपस्थिति में सम्पन्न हुआ। समारोह के दौरान सभी विद्यार्थियों की उपाधियाँ डिजीलॉकर पर अपलोड की गईं। विशेष कार्याधिकारी डॉ. सुधीर महादेव बोबडे दीक्षांत समारोह में राज्यपाल का संदेश पढ़कर सुनाया।

राज्यपाल ने अपने संदेश में उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनकी यह उपलब्धि वर्षों के परिश्रम, दृढ़ संकल्प और अनुशासन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आज प्रदान की गई उपाधियाँ केवल शैक्षणिक उपलब्धि का प्रमाण नहीं हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व का भी प्रतीक है। उन्होंने विशेष प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार कुल 156 पदकों में से 45 पदक दिव्यांग विद्यार्थियों ने अर्जित किए हैं। यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि सफलता का निर्धारण किसी व्यक्ति की शारीरिक सीमाओं से नहीं, बल्कि उसके संकल्प, परिश्रम और आत्मविश्वास से होता है।

उन्होंने कहा कि डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय समावेशी शिक्षा का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां दिव्यांग एवं सामान्य विद्यार्थी समान अवसरों के साथ एक ही परिसर और एक ही कक्षा में अध्ययन करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा को केवल व्यक्तिगत उन्नति तक सीमित न रखें, बल्कि समाज के वंचित, दिव्यांग एवं जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

उपाधि प्राप्त करना जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं : सी. सदानंदन मास्टर

समारोह के मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद सी. सदानंदन मास्टर ने अपने संबोधन में कहा कि उपाधि प्राप्त करना विद्यार्थियों के जीवन का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विद्यार्थियों के समर्पण एवं दृढ़ संकल्प का परिणाम है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों तथा उनके परिवारजनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।

उन्होंने कहा कि डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय समावेशी शिक्षा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ दिव्यांग एवं सामान्य विद्यार्थी साथ पढ़ते हैं, साथ सीखते हैं और साथ आगे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि यही वास्तविक समावेशन है। जब हम एक-दूसरे की क्षमताओं का सम्मान करते हैं, तभी एक मजबूत, संवेदनशील एवं समावेशी समाज का निर्माण संभव होता है। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा प्रौद्योगिकी, कौशल विकास एवं नवाचार के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति में विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि विकास तभी पूर्ण माना जाएगा, जब उसमें समाज का प्रत्येक वर्ग समान रूप से सहभागी होगा।

इस अवसर पर विशेष कार्याधिकारी, राज्यपाल डॉ. सुधीर महादेव बोबडे ने अपने संबोधन में जापान प्रवास के अनुभव साझा करते हुए कहा कि जहाँ कहीं भी श्रेष्ठ कार्यप्रणालियां हों, उन्हें अपनाने का प्रयास किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय की पाबंदी, टीम भावना, राष्ट्रहित को ’’सर्वाेपरि’’ रखने की सोच, सुनियोजित कार्यप्रणाली तथा कठोर परिश्रम जैसे मूल्य व्यक्ति को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता दिलाने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

उन्होंने कहा कि शौचालयों, निर्माणाधीन कार्यों, कक्षाओं में अध्यापकों हेतु प्लेटफॉर्म के निर्माण, छात्रावासों, प्रयोगशालाओं, आवासीय परिसरों तथा परिसर की स्वच्छता संबंधी व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता है। साथ ही, अनुपयोगी सामग्री के समयबद्ध निस्तारण, अग्नि सुरक्षा उपकरणों की समुचित उपलब्धता, शैक्षणिक कैलेंडर नियमित रूप से जारी करने तथा विद्यार्थियों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया। उन्होंने बताया कि छात्र-छात्राओं से प्राप्त सुझावों के आधार पर छात्रावास एवं मेस व्यवस्थाओं को और अधिक प्रभावी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने तथा अन्य राज्य विश्वविद्यालयों की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को अपनाने की आवश्यकता है।

समारोह को उत्तर प्रदेश सरकार के दिव्यांगजन सशक्तिकरण एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने संबोधित करते हुए कहा कि डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय दिव्यांग विद्यार्थियों की प्रतिभा, आत्मविश्वास और संकल्प का सशक्त प्रतीक बनकर उभरा है। उन्होंने उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी सफलता कठिन परिश्रम, अनुशासन और विश्वविद्यालय के गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास तथा आत्मनिर्भरता के लिए निरंतर प्रभावी कदम उठा रही है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.संजय सिंह ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की स्मारिका का विमोचन भी किया गया तथा विश्वविद्यालय में उत्कृष्ट योगदान देने वाले एक शिक्षक को सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर प्रमुख सचिव, दिव्यांगजन सशक्तिकरण एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण, राजेश कुमार सिंह, विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद एवं विद्यापरिषद के सदस्यगण, समस्त संकायाध्यक्ष, आमंत्रित अतिथिगण, शिक्षकगण, अभिभावकगण, आँगनबाड़ी कार्यकर्त्रियाँ तथा विभिन्न विद्यालयों से आए विद्यार्थी उपस्थित रहे।