खेजड़ी संरक्षण कानून की मांग को लेकर 20 जुलाई को बीकानेर में जनसभा और रैली
बीकानेर, 19 जुलाई । राजस्थान में खेजड़ी सहित सभी पेड़ों के संरक्षण के लिए सख्त ट्री एक्ट लागू करने की मांग को लेकर बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों ने आंदोलन तेज करने की घोषणा की है। इस क्रम में 20 जुलाई को बीकानेर जिला कलक्ट्रेट के सामने विशाल जनसभा और रैली आयोजित की जाएगी।
सर्किट हाउस में शनिवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में अखिल भारतीय विश्नोई महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष देवेन्द्र बुडिया ने कहा कि पूर्व में राज्य सरकार द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने के बावजूद पेड़ों के संरक्षण के लिए ठोस कानून नहीं बनाया गया, जिससे समाज में नाराजगी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार समय रहते पेड़ों की कटाई पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने वाला प्रभावी कानून नहीं बनाती है तो अगले महीने विधानसभा का घेराव किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सांकेतिक धरना एवं प्रदर्शन में बीकानेर, जोधपुर, बालोतरा, बाड़मेर, जैसलमेर, नागौर सहित प्रदेशभर से समाज के लोग और पर्यावरण प्रेमी शामिल होंगे।
पूर्व पार्षद मनोज विश्नोई ने कहा कि सरकार के लिखित आश्वासन के बावजूद न तो खेजड़ी की कटाई रुकी और न ही इस संबंध में कानून बनाया गया। उन्होंने कहा कि यदि विधानसभा के वर्तमान सत्र में कानून नहीं बना तो आगामी पंचायत और निकाय चुनावों में सरकार को इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
पत्रकार वार्ता में हड़मान बेनीवाल ने कहा कि फरवरी में हुए आंदोलन के बाद मुख्यमंत्री के साथ हुई वार्ता के उपरांत राजस्व विभाग के सचिव ने पूरे राजस्थान में खेजड़ी की कटाई पर रोक लगाने संबंधी आदेश जारी किए थे और सभी जिला कलक्टरों को निर्देश भी दिए गए थे। इसके बावजूद सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहण के दौरान बड़ी संख्या में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई जारी है। उनका आरोप था कि पेड़ काटने वालों पर नाममात्र का जुर्माना लगाया जा रहा है, जिससे अवैध कटाई पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।
आंदोलनकारियों ने दावा किया कि समाज खेजड़ी संरक्षण के मुद्दे पर एकजुट है। उन्होंने यह भी कहा कि कुलदीप विश्नोई आंदोलन के किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होते, इसलिए उनका बहिष्कार किया गया है। उन्होंने कहा कि खेजड़ी राजस्थान का राज्य वृक्ष है और इसे रेगिस्तान का ‘कल्पवृक्ष’ तथा ‘जीवनरेखा’ माना जाता है। बिश्नोई समाज के लिए यह केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि उनकी आस्था और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है।
पत्रकार वार्ता में मांगीलाल नोखड़ा, मोखराम धारणिया, भोमाराम भादू, हेतराम डूडी, दिनेश, रामदयाल बेनीवाल, सुनील सींगड़, मुकेश पन्नू, लक्ष्मण कुमावत, राकेश विश्नोई, संदीप खींचड़ और अनिल विश्नोई सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।









