डायन कुप्रथा समाज के लिए अभिशाप : एडीजे
पलामू, 17 जून । डायन कुप्रथा सभ्य समाज के लिए अभिशाप है। इसे मिटाने के लिए सबका साथ जरूरी है। यह अंधविश्वास है और अंधविश्वास समाज को खोखला कर रहा है। उक्त बातें नव नियुक्त अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ज्योति शील ने कही। वे पलामू के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीराम शर्मा के मार्गदर्शन में बुधवार को जिले के छतरपुर प्रखंड के खजूरी नौडीहा पंचायत सचिवालय में डायन बिसाही बिषय पर आयोजित विधिक जागरूकता शिविर में बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रही थीं।
इसके पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन डालसा अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ज्योति शील, डालसा सचिव राकेश रजंन, छतरपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी आशिष कुमार, छतरपुर थाना प्रभारी सौरभ चौबे सहित अन्य ने संयुक्त रूप से किया।
अतिथियों का स्वागत गुलदस्ता भेटकर किया गया।
मौके पर शील ने कहा कि डायन कुप्रथा से न केवल महिलाओं में बल्कि समाज में भी नकारात्मक विचारधारा बन रही है।
डालसा सचिव राकेश रंजन ने कहा कि कमजोर और असहाय महिलाओं को डायन बताकर प्रताड़ित करने की कुप्रथा के कारण कई बार स्थिति भयावह हो जाती हैं। ऐसी घटनाओं के पीछे किसी न किसी का स्वार्थ छुपा रहता हैं। ऐसे लोगों की पहचान करने की जरूरत है। बीडीओ आशीष कुमार ने कहा कि डायन के नाम पर किसी महिला को प्रताड़ित करना अशिक्षित समाज को दर्शाता है।
लीगल एड डिफेंस काउंसिल के डिप्टी चीफ संतोष कुमार पांडेय ने कहा कि डायन बिसाही के मामले में पुरूष से ज्यादा महिलाएं शिकार होती हैं। उन्होंने कहा कि किसी महिला को डायन घोषित करने के पीछे अधिकतर मामलों में साजिश होती है।
महिला थाना प्रभारी रूपा बाखला ने कहा कि शिक्षा के कमी और जागरूकता के अभाव के कारण डायन कुप्रथा आज भी समाज में मौजूद है, जिसके कारण कई मासूम महिलाओं की जान चली जाती हैं। यह जागरूकता से ही मिटेगी।
मौके पर बीएनएस लॉ कॉलेज की छात्रा नेहा पाण्डेय ने कहा कि जुर्म करें नहीं व जुर्म सहे नहीं। जरूरत पड़े तो डालसा का दरवाजा









