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अनुदान रोकने से नाराज शिक्षकों ने किया पुतला दहन और चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान

पलामू, 03 अप्रैल । झारखंड में 223 अनुदानित एवं वित्तरहित शिक्षण संस्थानों का अनुदान रोके जाने के विरोध में शिक्षक और कर्मचारी अब आंदोलन के मूड में आ गए हैं।

झारखंड राज्य वित्तरहित शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने 4 अप्रैल को राज्यभर के लगभग 600 अनुदानित और 1250 वित्तरहित स्कूल-कॉलेजों में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव का पुतला दहन करने की घोषणा की है।

मोर्चा ने आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से चलाने का निर्णय लिया है। इसके तहत 10 अप्रैल को राजभवन मार्च, 15 अप्रैल तक विधायकों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपना, प्रमंडलवार धरना और अप्रैल के अंतिम सप्ताह में मुख्यमंत्री आवास घेराव करने की चेतावनी दी गई है।

मोर्चा के नेता मनीष कुमार ने पलामू में आयोजित बैठक के बाद कहा कि सरकार ने बिना समुचित जांच के कुछ संस्थानों को अनुदान जारी किया, जबकि अधिकांश संस्थानों का अनुदान रोक दिया गया। उन्होंने इसे सरकार का दोहरा मापदंड बताते हुए कड़ा विरोध जताया।

उन्होंने आरोप लगाया कि शासी निकाय, बंधक विलेख, उपयोगिता प्रमाण पत्र और शपथ पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेजों के आधार पर 223 संस्थानों का अनुदान काट दिया गया, जबकि ये सभी दस्तावेज विभागीय पोर्टल पर अपलोड किए गए थे। तकनीकी गड़बड़ी के कारण दस्तावेज गायब हो जाने का खामियाजा अब शिक्षकों और संस्थानों को भुगतना पड़ रहा है।

मोर्चा ने सरकार पर वित्तरहित संस्थानों को समाप्त करने की साजिश का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि यह कदम 2004 के अधिनियम की धाराओं के विपरीत है, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि स्थापना अनुमति प्राप्त या स्वतः मान्यता प्राप्त संस्थानों को अनुदान से वंचित नहीं किया जा सकता।

इसके अलावा, तीन जनजातीय बहुल जिलों की अनुदान राशि के लैप्स होने का मुद्दा भी उठाया गया, जिससे आदिवासी और पिछड़े वर्ग के हजारों छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। मोर्चा ने बताया कि पिछले वर्ष खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम की राशि भी इसी तरह लैप्स हुई थी, जिसे लंबे आंदोलन के बाद जारी कराया गया था।

बैठक में रघुनाथ सिंह, गणेश महतो, अरविंद सिंह, देवनाथ सिंह, नरोत्तम सिंह, मुरारी सिंह, डालेश चौधरी, मनोज तिर्की, फजलुल कादरी अहमद और हरिहर प्रसाद कुशवाहा सहित कई शिक्षक और पदाधिकारी उपस्थित थे।

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