बाबूलाल सोरेन को बैल कहना केवल मेरे बेटे का नहीं, पूरे आदिवासी समाज का अपमान : चंपाई सोरेन

चुनावी प्रचार के अंतिम दिन घाटशिला में एटमॉस्फियर रिसोर्ट में भावुक होते हुए चंपाई सोरेन ने प्रेस वार्ता में कहा कि यह चुनाव उनके बेटे बाबूलाल सोरेन का नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता और स्वाभिमान की रक्षा का संघर्ष है। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी जिंदगी का हर पल उस पार्टी (झामुमो) को मजबूत करने में लगाया, जिसके लिए हमने जंगलों में संघर्ष किया। लेकिन आज उसी पार्टी के मुखिया ने हमारे समाज, हमारी अस्मिता का अपमान किया है। बाबूलाल सोरेन को ‘बैल’ कहना केवल मेरे बेटे का नहीं, पूरे आदिवासी समाज का अपमान है।”

पूर्व मुख्यमंत्री की आंखें भर आईं जब उन्होंने कहा, “हम आदिवासी हैं, हमारे पास दिल है, सम्मान है, भावनाएं हैं। सत्ता के नशे में कोई भी व्यक्ति यह भूल जाए कि हम अपमान सह लेंगे, यह उसकी भूल होगी। मैं घाटशिला की जनता से अपील करता हूं कि वे इस अपमान का जवाब वोट की चोट से दें।”

चंपई सोरेन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में आदिवासी बेटियों की सुरक्षा खतरे में है, जनसांख्यिकीय संतुलन बदल रहा है, परंतु सत्ता में बैठे लोग इन गंभीर मुद्दों पर मौन हैं। “वे जनता की समस्याओं का समाधान करने की बजाय दूसरों को नीचा दिखाने में व्यस्त हैं।

उन्होंने जनता से भावुक अपील करते हुए कहा, “यह चुनाव मेरे लिए राजनीति का प्रश्न नहीं, बल्कि अपने स्वाभिमान और आदिवासी अस्मिता की रक्षा का प्रश्न है। मैं जनता से विनती करता हूं कि वे झारखंड की आत्मा की रक्षा के लिए मतदान करें।”