बांके बिहारी कॉरिडोर विवाद: 500 साल पुरानी गलियों का भविष्य अनिश्चित, सेवायतों ने जताई चिंता!
**वृंदावन में बांके बिहारी कॉरिडोर: लोगों की राय और प्रशासन की तैयारियां**
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को बांके बिहारी मंदिर के पास कॉरिडोर बनाने के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण की अनुमति दी है। इस योजना से प्रभावित 3,500 लोगों में चिंता और नाराजगी का माहौल देखा जा रहा है। प्रशासन ने एक 600 करोड़ के इस प्रोजेक्ट का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया है, जिसमें मथुरा-वृंदावन के आसपास की 300 से अधिक संपत्तियों का सर्वेक्षण किया जाएगा। इससे पहले कॉरिडोर की योजना को लेकर स्थानीय लोगों को कई सवालों का सामना करना पड़ रहा है कि क्या यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा होगा और इस का उनके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
दैनिक भास्कर की टीम ने ग्राउंड जीरो पर जाकर विभिन्न लोगों के विचारों को सुना। कुछ लोगों ने कॉरिडोर की जरूरत पर सहमति जताई, जबकि दूसरे लोगों ने इसे शासन की मनमानी करार दिया। तीर्थ पुरोहितों का मानना है कि कॉरिडोर का निर्माण रुकेगा नहीं और यह स्थानीय संस्कृति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है। वहीं, बाजार के व्यापारियों ने चिंता व्यक्त की है कि कॉरिडोर बनने से उनके व्यापार पर गहरा असर पड़ सकता है।
कॉरिडोर के संबंध में बने बाजार के अध्यक्ष नीरज गौतम ने कहा कि इसे केवल व्यापार का मामला न मानें, बल्कि इससे वृंदावन की सांस्कृतिक धरोहर भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रोजेक्ट में सभी पहलुओं का ध्यान नहीं रखा गया तो वृंदावन का असली स्वरूप नष्ट हो सकता है। दूसरी ओर, व्यापारियों ने न्यायालय के फैसले पर विचार करने की बात कही, ताकि वे अपनी सुरक्षा को सुनिश्चित कर सकें।
इसी माहौल में, पुजारी और सेवायतों ने भी इस विषय पर अपनी चिंताओं को साझा किया। पुजारी मोहन गोस्वामी ने कहा कि यदि मंदिर के पैसे से जमीन ली जा रही है, तो यह स्वीकार्य है, लेकिन विकास कार्य के लिए स्थानीय लोगों को नुक्सान नहीं पहुंचाना चाहिए। सेवायत ज्ञानेंद्र गोस्वामी का मानना है कि प्राचीन गलियों का विकास न केवल उनकी सांस्कृतिक पहचान को मिटाएगा, बल्कि समाज में असंतोष भी बढ़ाएगा।
अंत में, वृंदावन के प्रमुख संत महंत फूलडोल बिहारी दास ने कहा कि यदि कॉरिडोर के निर्माण में किसी की दुकान या मकान टूटते हैं, तो उन्हें उचित मुआवजा देना चाहिए, ताकि लोग इस प्रोजेक्ट का विरोध न करें और सभी पक्षों को संतोष मिले। पर्यटकों की बढ़ती संख्या के साथ, वृंदावन का विकास आवश्यक है, लेकिन सभी को साथ लेकर चलने की जरूरत है। इस प्रकार, भविष्य में कॉरिडोर निर्माण हो पाएगा और स्थानीय संस्कृति को भी सुरक्षित रखा जा सकेगा।
कॉरिडोर के निर्माण को लेकर यह बहस देश के सांस्कृतिक एवं धार्मिक संवेदनाओं को उजागर करती है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि विकास के साथ-साथ स्थान की ऐतिहासिकता और सामाजिक ताने-बाने को भी बनाए रखना चाहिए।









