जज कैश कांड: CJI ने पीएम-राष्ट्रपति को सौंपी रिपोर्ट, तीन जजों की कमेटी कर रही जांच!

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने जस्टिस यशवंत वर्मा से जुड़े कैश रिकवरी प्रकरण की जांच रिपोर्ट राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंप दी है। इस मामले की जांच एक तीन सदस्यीय समिति द्वारा की गई थी, जिसमें पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस शील नागू, हिमाचल प्रदेश के चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया और कर्नाटक उच्च न्यायालय की जस्टिस अनु शिवरामन शामिल थे। यह जांच प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के अंतर्गत एक आंतरिक रूप से की गई है, और इस संदर्भ में जस्टिस वर्मा का उत्तर भी रिपोर्ट के साथ प्रस्तुत किया गया है। रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है, और जानकारी के अनुसार, इसे 4 मई को सीजेआई को सौंपा गया था।

जस्टिस यशवंत वर्मा की जांच की प्रक्रिया तब शुरू हुई जब 16 मार्च को उनके बंगले के बाहर सफाई करते समय सफाई कर्मचारियों को 500-500 रुपये के अधजले नोट मिले थे। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी इसी प्रकार के नोट मिले थे। इस घटना ने न्यायालय और कानून से जुड़े अधिकारियों के बीच चिंता बढ़ा दी, जिसके परिणामस्वरूप इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने 23 मार्च को जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का निर्णय लिया। उन्होंने साथ ही जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कार्रवाई करने की मांग की। इसके बाद, न्यायालय ने जस्टिस वर्मा का कार्यभार 23 मार्च को वापस ले लिया था।

जांच कमेटी ने 28 मार्च को जस्टिस वर्मा को तलब किया, जिसमें उनसे उनके घर में आग लगने और कैश संबंधी मुद्दों पर सवाल पूछे गए। इसी दिन दिल्ली फायर सर्विस के अधिकारी भी जांचकमेटी के समक्ष पेश हुए। रिपोर्ट के अनुसार, फायर सर्विस के चीफ अतुल गर्ग ने कहा कि अग्निशामक कर्मचारियों द्वारा कोई नकदी बरामद नहीं की गई थी। इसके अतिरिक्त, इस मामले में दिल्ली पुलिस के आठ कर्मियों के मोबाइल फोन को फोरेंसिक विभाग के पास भेजा गया ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या आग लगने के समय कोई वीडियो रिकॉर्डिंग की गई थी या नहीं।

जस्टिस यशवंत वर्मा का नाम इससे पहले 2018 में भी गड़बड़ी के एक मामले में आया था, जब गाज़ियाबाद की सिम्भावली शुगर मिल में 97.85 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एफआईआर दर्ज की थी। इस मामले में जस्टिस वर्मा कंपनी के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे। हालांकि, इस मामले में आगे कोई ठोस प्रगति नहीं हुई और फरवरी 2024 में एक अदालत ने CBI को जांच फिर से शुरू करने का आदेश दिया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को पलट दिया।

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून से जुड़े मुद्दे पर भी सुनवाई हो रही है, जिसमें 15 मई को मामले की अगली सुनवाई होगी। केंद्र सरकार ने 12 सालों में वक्फ की संपत्ति में वृद्धि के बारे में हलफनामा दिया है, और कोर्ट ने वक्फ बोर्ड में नई नियुक्तियों पर रोक लगा दी है। इस प्रकार, न्यायालय और न्यायिक प्रक्रियाओं से संबंधित विभिन्न घटनाएं न्यायपालिका के प्रति विश्वास और जवाबदेही को मजबूत करने के दिशा में एक कदम साबित हो सकती हैं।