उदयपुर में समुद्र थीम पर बाबा के दरबार का दिव्य आयोजन, भक्तों का भक्ति उल्लास!

उदयपुर में शनिवार शाम को भव्य श्याम महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें धार्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत वातावरण में भक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस महोत्सव में भजन सम्राट नंदू महाराज सहित कई नामी भजन गायक जैसे नरेश सैनी, बंटू भैया, महावीर अग्रवाल वासु और मयूर रस्तोगी ने अपनी मधुर आवाज में भजन गाए, जिससे सभी भक्त आनंदित हुए। कार्यक्रम का आयोजन उदयपुर के फतह स्कूल के मैदान में हुआ, जहां श्री खाटू श्याम मित्र मंडल ट्रस्ट द्वारा तीन दिन तक चलने वाले इस महोत्सव का आखिरी दिन मनाया गया।

भक्तों का आनंद और जोश देखने लायक था। उन्होंने खाटू के दरबार में भक्ति भाव से नाचते-झूमते हुए बाबा की आराधना की। हर भक्त को एक विशेष सम्मान का अनुभव हुआ, क्योंकि सभी को बाबा की ज्योत पधराई गई और उनका आशीर्वाद प्राप्त हुआ। इस आयोजन में श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए गंगाजल से हाथ धोने और तिलक करने की व्यवस्था की गई, जिससे भक्तों को बाबा के दर्शनों और ज्योत से जोड़ने में आसानी हुई। भजन संध्या का प्रारंभ महावीर अग्रवाल वासु की गणेश वंदना से हुआ, जिसने आस्था और श्रद्धा से भरी हुई एक अद्भुत शुरुआत की।

भजन सम्राट नंदू महाराज ने जब “कीर्तन की है रात बाबा आज थाणे आणो है” भजन गाना शुरू किया, तो भक्तों का उत्साह और बढ़ गया। उन्होंने अपने कई लोकप्रिय भजन प्रस्तुत किए, जिससे भक्त बाबा की भक्ति में लीन हो गए। नंदू महाराज का भजन “मेरे बाबा बड़े दिलदार हैं” सुनकर उपस्थित भक्तों में एक अद्भुत भावुकता देखने को मिली। इसी बीच, गुरुग्राम के भजन गायक नरेश सैनी ने भी अपने बेहतरीन भजनों से भक्तों का दिल जीता और महोत्सव का माहौल और भी भक्ति पूर्ण बना दिया।

इस तीन दिवसीय महोत्सव की खास बात यह थी कि इसे समुद्र की थीम पर सजाया गया था, जो कि उदयपुर में पहली बार देखा गया। भव्य 3D सेटअप के साथ दर्शकों को एक अद्वितीय अनुभव प्राप्त हुआ। इस अवसर पर सभी भक्ति प्रेमियों के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई, जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद का आनंद लिया। बाबा के सुंदर श्रृंगार और छप्पन भोग का आयोजन क्रमशः रात 8 बजे से किया गया, जिससे भक्तों को विशेष महाप्रसाद अर्पित किया गया।

आखिरी दिन का समापन महाआरती और भव्य भोग से हुआ, जिसमें विभिन्न प्रकार के फल, मिठाइयाँ और बाबा के प्रिय व्यंजन शामिल थे। इस महोत्सव ने भक्तों के बीच एकता और भक्ति को बढ़ावा दिया, साथ ही अभूतपूर्व धार्मिक उत्साह का अनुभव कराया। इस तरह का आयोजन न सिर्फ धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि सामाजिक सौहार्द का भी प्रतीक बनता है।