दिल्ली में ऊंची इमारतों पर एंटी-स्मॉग गन के संचालन को अनिवार्य किया

दिल्ली में ऊंची इमारतों पर एंटी-स्मॉग गन के संचालन को अनिवार्य किया

नई दिल्ली, 30 मई (हि.स.)। वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने राजधानी की ऊंची इमारतों पर सालभर एंटी स्मॉग गन संचालन को अनिवार्य कर दिया है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के निर्देशानुसार पर्यावरण विभाग एनसीटी दिल्ली ने पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 की धारा 5 के तहत एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। इसके अंतर्गत अब दिल्ली की चयनित ऊंची इमारतों पर सालभर एंटी-स्मॉग गन का संचालन अनिवार्य कर दिया गया है। यह पहली बार है जब दिल्ली ने वर्टिकल ढांचे को वायु प्रदूषण नियंत्रण के तहत शामिल किया है। यह आदेश सभी व्यावसायिक परिसरों, मॉल, और होटलों (निर्मित क्षेत्र 3,000 वर्ग मीटर), तथा जी+5 या उससे ऊंची संस्थागत और कार्यालय इमारतों पर लागू होगा। आवासीय भवनों, ग्रुप हाउसिंग सोसाइटीज़, और व्यक्तिगत मकानों को इससे छूट दी गई है।

मंत्री सिरसा ने कहा कि यह हमारे बच्चों की सांस लेने की शुद्ध हवा का सवाल है। वर्षों से यह प्रदूषण स्रोत केवल परामर्श या मौसमी नियंत्रण तक सीमित था। आज हमने विधिक रूप से इसे नियंत्रित करने का निर्णय लिया है। अब यह अनिवार्य है—स्मॉग गन लगाइए, निर्देशानुसार चलाइए, नहीं तो कार्रवाई झेलिए। अब बहानों के लिए कोई जगह नहीं बची है। इस निर्णय के साथ दिल्ली देश का पहला ऐसा शहर बना है जिसने कानूनी रूप से बिल्डिंग की छत पर एंटी-स्मॉग ढांचे को शहरी नीति में शामिल किया है। यह कदम मौसमी प्रतिक्रिया से सालभर चलने वाली, नियम आधारित पर्यावरणीय प्रवर्तन प्रणाली की ओर प्रशासनिक बदलाव का प्रतीक है।

निर्देश के अनुपालन के संबंध में कहा गया है कि एंटी-स्मॉग गन की तैनाती की समय सीमा आदेश जारी होने की तिथि से छह महीने के भीतर है। इसका संचालन केवल 15 जून से 1 अक्टूबर मानसून अवधि को छोड़कर वर्षभर करना अनिवार्य है। एंटी-स्मॉग गन की संख्या 10,000 वर्ग मीटर से कम के लिए न्यूनतम 3 गन होनी चाहिए। फिर प्रत्येक 5,000 वर्ग मीटर पर 1 अतिरिक्त गन की तैनाती अनिवार्य होगी। ये गन इमारत की परापेट वॉल पर स्थायी ब्रैकेट से लगाई जाएंगी। मोबाइल ट्रेलर से नहीं। प्रत्येक एंटी-स्मॉग गन में 75 से 100 मीटर की क्षैतिज थ्रो क्षमता और 5 से 20 माइक्रॉन के मिस्ट ड्रॉपलेट्स होने चाहिए ताकि पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे कणों को प्रभावी ढंग से दबाया जा सके। संचालन अधिकतम 1,200 लीटर प्रति घंटा या 8 घंटे में 10,000 लीटर से अधिक नहीं होना चाहिए।

मंत्री ने कहा कि यह निर्देश प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त उपायों की आवश्यकता को ध्यान में रखकर जारी किया गया है। अक्टूबर से जनवरी के बीच वायु गुणवत्ता में गिरावट दर्ज की जाती है, जिसके कारण तत्काल पर्यावरण संरक्षण उपाय की आवश्यकता महसूस हुई।

मंत्री सिरसा ने कहा एंटी स्मॉग गन को दिन में तीन बार अधिकतम प्रदूषण घंटों (सुबह 6:30–9:30, शाम 5:30–8:30, रात 1:30–4:30 ) के दौरान अल्पकालिक बर्स्ट में चलाना होगा ताकि इसकी प्रभावशीलता अधिक हो और बिजली-पानी की बचत हो सके। उपकरणों में न्यूनतम ध्वनि उत्पादन और संभव हो तो रीयल-टाइम वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग सेंसर भी होने चाहिए।

—————