शबाना आजमी ने किया खुलासा: ‘परवीन बाबी की अजीब हरकतों का गवाह बनीं मैं’!

प्रसिद्ध बॉलीवुड अभिनेत्री शबाना आजमी ने हाल ही में अपनी सह-अभिनेत्री परवीन बाबी के साथ बिताए दिनों को याद करते हुए कुछ चौंकाने वाली बातें साझा की हैं। शबाना ने खुलासा किया कि उन्होंने परवीन के व्यवहार में धीरे-धीरे अजीबोगरीब परिवर्तन देखे थे। उन्होंने अपनी यादों को ताजा करते हुए कहा कि यह सब उस समय की बात है जब वे प्रकाश मेहरा की फिल्म ‘ज्वालामुखी’ की शूटिंग कर रही थीं। सेट पर अचानक से परवीन ने झूमर की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह उन पर गिरने वाला है, जिससे यह स्पष्ट होता था कि उनकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है।

शबाना आजमी ने बताया कि इस घटना के साथ-साथ, उन्होंने देखा कि परवीन आहार को लेकर भी काफी चिंतित थीं। वह केवल दो अंगूर खाकर ही संतुष्ट हो जाती थीं और अक्सर कहती थीं कि ऐसा करने से वह फट जाएंगी। इससे पता चलता है कि उनकी मानसिक हालत कितनी गंभीर हो चुकी थी। ऐसा प्रतीत होता था कि परवीन को लगातार किसी न किसी प्रकार का आतंक सताता रहता था, और यह उनके व्यवहार में भी दिखाई दे रहा था।

एक अन्य घटना में, शबाना ने साझा किया कि जब जीनत अमान अपना मेकअप करवा रही थीं, तब परवीन बाबी अचानक उनके पीछे जाकर उनके ऊपर अजीब नजरें गड़ाए थीं। इससे उनके सहकर्मियों को यह एहसास होने लगा था कि परवीन बाबी के मन में कुछ ऐसा चल रहा है जिससे वह जूझ रही थीं। इस बात को लेकर जब शबाना से पूछा गया कि क्या अन्य कलाकारों के साथ परवीन की मानसिक स्थिति पर चर्चा होती थी, तो उन्होंने कहा कि इस विषय पर कभी भी खुलकर बात नहीं की जाती थी।

शबाना ने यह भी बताया कि परवीन बाबी हमेशा रहस्यमय चीजों पर चर्चा करना चाहती थीं और पढ़ाई में गहरी रुचि रखती थीं। वह एक बड़ी फिल्म स्टार थीं, लेकिन उन्होंने कभी भी अपनी स्टार वाली छवि को नहीं अपनाया। यह महज एक façade था, क्योंकि वह खुद को एक अलग स्तर की बुद्धिमत्ता की खोज में लगी हुई थीं। हालांकि, इस खोज ने उन्हें मानसिक समस्याओं की ओर भी धकेल दिया था।

अंततः, परवीन बाबी की जिंदगी का अंत एक दुखद कहानी है। उन्होंने पैरानॉयड पर्सनालिटी डिसऑर्डर से जूझते हुए 2005 में अपनी जान गंवा दी। उनकी लाश तीन दिन बाद उनके घर से बरामद की गई, जो उनके जीवन की एक दर्दनाक समाप्ति का प्रतीक है। बॉलीवुड की इस महान अभिनेत्री की कहानी न केवल उनके फैन, बल्कि सभी के लिए एक चेतावनी है कि मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।