कुणाल कामरा केस: बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई, महाराष्ट्र सरकार को जवाब देने का निर्देश!

स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा के खिलाफ जारी विवाद में आज बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई होने जा रही है। कामरा ने खुद पर लगे FIR को रद्द करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इस मामले की गंभीरता को समझते हुए, कोर्ट ने कामरा की याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा था। जस्टिस सारंग कोतवाल और जस्टिस एसएम मोदक की पीठ ने राज्य के साथ-साथ शिकायतकर्ता, शिवसेना के विधायक मुरजी पटेल को भी औपचारिक नोटिस जारी किया था। दोनों पक्षों को न्यायालय में 16 अप्रैल को अपने-अपने तर्क रखने का अवसर मिलेगा। इस मामले की विस्तृत सुनवाई उसी दिन दोपहर ढाई बजे पर निर्धारित की गई है।

कुणाल कामरा ने मामले की तात्कालिकता को दर्शाते हुए तुरंत सुनवाई की मांग की थी। उन्हें हाल ही में बॉम्बे हाईकोर्ट से राहत मिली थी, जब उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर एक पैरोडी गाने मामले में पुलिस की FIR से जुड़ी अंतरिम सुरक्षा को 17 अप्रैल तक बढ़ा दिया था। इसके साथ ही, कामरा ने अपनी याचिका में FIR को रद्द करने की मांग की है, जिस पर उन्होंने जल्द सुनवाई की अपील की थी। हालांकि, 7 अप्रैल को अदालत ने उनकी सुनवाई की तुरंत मांग को स्वीकार नहीं किया था, लेकिन 8 अप्रैल को इसे सुनने पर सहमति जताई।

कामरा ने 5 अप्रैल को याचिका दायर की थी जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके खिलाफ की गई FIR संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। इस पृष्ठभूमि में, कामरा ने 1 अप्रैल को मद्रास हाईकोर्ट में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी, जहाँ उन्होंने अनुरोध किया था कि उन्हें गिरफ्तार होने से बचाने के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी जाए। न्यायाधीश सुंदर मोहन ने उनकी याचिका को स्वीकार करते हुए उन्हें ट्रांजिट अग्रिम जमानत प्रदान की थी। इससे पहले, 28 मार्च को हाईकोर्ट ने उन्हें 7 अप्रैल तक की अग्रिम जमानत दी थी।

इस विवाद की जड़ में कुणाल कामरा का एक स्टैंडअप कॉमेडी शो है, जिसमें उन्होंने महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को ‘गद्दार’ कहकर संबोधित किया था। जब यह वीडियो वायरल हुआ, तो 23 मार्च की रात शिवसेना-शिंदे गुट के समर्थकों ने मुंबई के खार क्षेत्र में स्थित हैबिटेट कॉमेडी क्लब में हंगामा खड़ा कर दिया। शिंदे ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कामरा की टिप्पणियां अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का बलात्कार हैं। उनके खिलाफ मुंबई के खार पुलिस स्टेशन में तीन नए केस दर्ज किए गए थे, जिनमें एक शिकायत जलगांव की मेयर द्वारा और अन्य दो नासिक के बिजनेसमैन द्वारा की गई थी।

इस मामले में मुंबई पुलिस ने कामरा से पूछताछ करने के लिए समन जारी किए, जिनका एक कारावास 2 अप्रैल को भेजा गया था, जिसमें 5 अप्रैल को पेश होने का निर्देश था। हालाँकि, कामरा इस समन पर भी पुलिस के सामने उपस्थित नहीं हुए। इसके अलावा, महाराष्ट्र विधान परिषद ने भी कामरा के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस स्वीकार कर लिया था। मुंबई पुलिस ने 31 मार्च को उनके शिवाजी पार्क स्थित निवास पर भी छापा मारा था। अब यह देखना होगा कि बॉम्बे हाईकोर्ट इस मामले में आगे क्या निर्णय लेती है और कुणाल कामरा को कितनी राहत मिलती है।