खेलो इंडिया के बजट में तिगुना इजाफा, 2394 खिलाड़ियों को स्कॉलरशिप से मिलेगा फायदा!

पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने हाल ही में एक विशेष समारोह में 2,394 खिलाड़ियों को कुल 10.18 करोड़ रुपये की स्कॉलरशिप प्रदान की। यह आयोजन चंडीगढ़ के सेक्टर-42 स्थित सरकारी कॉलेज में संपन्न हुआ, जहां उन्होंने खिलाड़ियों को सम्मानित किया और उन्हें कड़ी मेहनत और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। कटारिया ने इस अवसर पर कहा कि खेल केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नहीं, बल्कि मानसिक मजबूती और जीवन कौशल सिखाने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि खेल से अनुशासन, टीमवर्क और नेतृत्व के गुण विकसित होते हैं।

गवर्नर कटारिया ने खिलाड़ियों को चेक वितरित करते हुए कहा, “हर खिलाड़ी में जीतने की अद्भुत क्षमता होती है। यदि आप मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के साथ आगे बढ़ेंगे, तो सफलता आपके कदम चूमेगी।” इस शानदार आयोजन में चंडीगढ़ के मुख्य सचिव राजीव वर्मा, राज्यपाल के प्रधान सचिव विवेक प्रताप सिंह, खेल सचिव प्रेरणा पुरी, खेल निदेशक सौरभ कुमार अरोड़ा और कई अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे, जिन्होंने इस पहल का समर्थन किया।

इस दौरान गवर्नर ने खेलो इंडिया कार्यक्रम के तहत बजट के तीन गुना बढ़ने की बात भी साझा की। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत में खेलों को एक नया मुकाम दिया जा रहा है। इस बढ़े हुए बजट से खिलाड़ियों को उच्च गुणवत्ता की सुविधाएं और संसाधन उपलब्ध होंगे, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने देश का नाम रोशन कर सकेंगे। यह एक सकारात्मक कदम है, जिससे आगामी खेल प्रतिभाओं को उचित प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलेगा।

गवर्नर कटारिया ने चंडीगढ़ के खेल इतिहास पर प्रकाश डालते हुए उल्लेख किया कि इस शहर ने कई विश्वस्तरीय खिलाड़ियों को जन्म दिया है, जैसे कि ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अभिनव बिंद्रा और प्रसिद्ध क्रिकेटर कपिल देव। उन्होंने विश्वास जताया कि नई खेल नीति से और अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ी उभरेंगे और भारत को गर्वित करेंगे। इस प्रकार, इस आयोजन ने न केवल खिलाड़ियों को प्रोत्साहन दिया, बल्कि भविष्य में खेल की दुनिया में चंडीगढ़ की पहचान को मजबूत करने का भी आश्वासन दिया।

समुचित संसाधनों और प्रोत्साहनों के साथ, गवर्नर का यह उद्म खेलों को नई दिशा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल खिलाड़ियों की क्षमता को तराशने में मदद मिलेगी, बल्कि यह भारतीय खेलों की प्रतिस्पर्धा को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगा। इस तरह के कार्यक्रमों से युवा पीढ़ी में खेल के प्रति रुचि बढ़ेगी, जो अंततः देश के लिए गौरव का कारण बनेगा।