पीएम सुरक्षा चूक पर किसानों का विरोध, 21 फरवरी को तीन बॉर्डरों पर श्रद्धांजलि सभा!

5 जनवरी 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाब दौरे के दौरान हुई सुरक्षा चूक की घटना ने एक बार फिर से ताजा चर्चा का विषय बना दिया है। इस मामले में अब कथित रूप से 25 किसानों पर धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया गया है, जिससे किसानों के बीच काफी नाराजगी उत्पन्न हो गई है। किसानों का कहना है कि पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इस मामले में उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके बावजूद, किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल खनौरी बॉर्डर पर आमरण अनशन पर बैठ गए हैं, जो अब अपने 84वें दिन में प्रवेश कर चुका है।

किसानों ने 21 फरवरी को तीनों बॉर्डरों पर श्रद्वांजलि समारोह आयोजित करने की योजना बनाई है। इस दिन वे युवा किसान शुभकरण सिंह की बरसी मनाने का निर्णय ले चुके हैं, जो किसान आंदोलन के दौरान शहीद हो गए थे। इस समारोह का आयोजन शुभकरण के गांव बल्लोह, बठिंडा में किया जाएगा, और इसके साथ-साथ शंभू, खनौरी और रतनपुर बॉर्डर पर भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान सभी शहीद किसानों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। किसानों की एक बैठक में इस कार्यक्रम की रणनीति भी तैयार की गई है, जिसमें हरियाणा के सिरसा से एक पैदल पत्र यात्रा 19 फरवरी को शुरू होकर 21 फरवरी को बठिंडा तक पहुंचेगी।

पंजाब में कानून व्यवस्था को लेकर स्थिति और भी जटिल हो गई है, क्योंकि फिरोजपुर कोर्ट ने जनवरी में किसानों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसमें हत्या के प्रयास की धारा भी जोड़ दी गई है। यह जानकारी तब सामने आई जब किसानों को इस संबंध में समन प्राप्त हुए थे। पुलिस ने बताया कि इसमें IPC की धारा 307, 353, 341, 186, 149 और नेशनल हाईवे एक्ट की धारा 8-बी भी शामिल की गई है। प्रारंभ में इस केस में केवल सार्वजनिक मार्ग में बाधा डालने की धारा 283 में मामला दर्ज किया गया था, लेकिन बाद में इस पर भाजपा नेताओं की आपत्ति के बाद संशोधन किया गया।

सुरक्षा चूक की घटना उस समय हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फिरोजपुर में एक रैली को संबोधित करना था और शहीद भगत सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए हुसैनीवाला स्मारक भी जाना था। दरअसल, मौसम की खराबी के चलते उन्हें सड़क मार्ग से यात्रा करनी पड़ी, और रास्ते में किसानों ने जाम लगा दिया था। इससे प्रधानमंत्री का काफिला करीब 20 मिनट तक रुका रहा, जिसके बाद पीएम को वापस लौटना पड़ा। इसके परिणामस्वरूप, कोर्ट ने 22 जनवरी को किसानों को पेश होने का आदेश दिया, लेकिन किसान कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए, जिसके चलते उनकी गिरफ्तारी की गई।

पंजाब राज्य की सरकार ने इस घटना के बाद कार्रवाई करते हुए सात पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया है, जिनमें पहले बठिंडा के एसपी गुरबिंदर सिंह शामिल हैं। उनकी जिम्मेदारी घटना के समय सुरक्षा व्यवस्था की देखरेख करना था। सस्पेंड किए गए अन्य अधिकारियों में DSP, इंस्पेक्टर और उप-निरीक्षक शामिल हैं। यह सभी अधिकारी 5 जनवरी 2022 को फिरोजपुर में तैनात थे, और उनकी लापरवाही के चलते ही यह सुरक्षा चूक हुई थी। सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच प्रक्रिया जारी रखी हुई है।