फरीदकोट: कर्मचारियों और पेंशनर्स का जोरदार प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ भूख हड़ताल!

पंजाब के फरीदकोट में पंजाब मुलाजिम एंड पेंशनर्स सांझा फ्रंट ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिला खजाना कार्यालय के बाहर भूख हड़ताल की। इस प्रदर्शन में उन्होंने सरकार के खिलाफ आवाज उठाई। इस संगठन ने पिछले लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया है और इसे किसी भी कीमत पर खत्म करने का मन नहीं बना रहा है। भले ही उनकी मांगों में काफी समय से कोई प्रगति न हुई हो, लेकिन फ्रंट के नेता कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की आवश्यकताओं को लेकर गंभीर दिख रहे हैं।

भोजन की इस हड़ताल के दौरान, फ्रंट के प्रतिनिधियों ने राज्य सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। इनमें साढ़े पांच साल से बकाया वेतन और पेंशन का भुगतान, संशोधित लीव-इन कैश मेंट की बाकी राशि की जल्द अदायगी, महंगाई भत्ते की तीन किश्तों का तत्काल भुगतान, तथा पेंशनर्स के लिए 2.59 का गुणांक लागू करना शामिल है। इसके अलावा, आउटसोर्स कर्मचारियों और स्कीम वर्करों को पूर्ण वेतनमान के साथ नियमित करने और पुरानी पेंशन योजना को उसके मूल स्वरूप में वापस करने की मांग भी की गई।

पेंशनर नेता इंद्रजीत सिंह खीवा ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद से, कर्मचारियों और पेंशनर्स को अपनी बुनियादी मांगों के लिए भी धरना प्रदर्शन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल फरीदकोट तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य भर में आंदोलन फैल रहा है। इस बेरुखी के खिलाफ संघर्ष को और तेज करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि 16 फरवरी को पंजाब विधानसभा में स्पीकर और अन्य विधायकों को मांग पत्र सौंपा जाएगा, जिससे उनकी समस्याओं का समाधान खोजा जा सके।

यह प्रदर्शन दर्शाता है कि कैसे सरकारी नीतियों और कार्यशैली ने कर्मचारियों के जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डाला है। राज्य में कर्मचारियों ने अनेक बार अपनी समस्याओं को उठाया है, लेकिन उन्हें सुनने वाला कोई दिखाई नहीं दे रहा है। इस समय की गई भूख हड़ताल केवल एक संकेत है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो यह आंदोलन और बढ़ेगा। संगठन ने सभी कर्मचारियों को एकजुट होकर इस संघर्ष को आगे बढ़ाने की अपील की है ताकि उनकी आवाज को मजबूती से उठाया जा सके।

इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। अगर सरकार ने इन मांगों का समाधान नहीं किया, तो कर्मचारियों का यह प्रदर्शन और भी तीव्र रूप ले सकता है। इस प्रकार के आंदोलन दिखाते हैं कि सरकारी नीतियों में सुधार की आवश्यकता है, जिससे कर्मचारियों और पेंशनर्स की समस्याएं दूर हो सकें। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाती है या फिर स्थिति और खराब होती है।