पंजाब उपचुनाव में हार पर राजा वडिंग का बयान: अगली बार जीत होगी पक्की!
पंजाब के चार विधानसभा क्षेत्रों में हुए उपचुनाव में कांग्रेस को तीन सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने हार की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेते हुए भविष्य के चुनावों में कांग्रेस की जीत का विश्वास जताया। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि चुनावी मैदान में जीत-हार एक सामान्य प्रक्रिया है। उनका उद्देश्य है कि वे 2027 में आगामी विधानसभा चुनाव को और बेहतर तरीके से लड़कर कांग्रेस को सफलता दिलाने में सक्षम हों।
राजा वडिंग ने कहा कि इस हार के पीछे वोटों के बंटवारे का बड़ा कारण है। उनका मानना है कि अगर अकाली दल का प्रतिद्धंदी चुनावी मैदान में होता, तो वह अपनी वोट प्रतिशत लाते और इससे कांग्रेस की जीत की संभावनाएं मजबूत होतीं। लेकिन, इस बार अकाली दल का उम्मीदवार नहीं होने के कारण उनका वोट आम आदमी पार्टी को चला गया। इसके साथ ही, भाजपा का भी कोई खास प्रदर्शन नहीं रहा, जिसके चलते कई वोट कांग्रेस के पास नहीं आ सके। उन्होंने विजेता उम्मीदवारों को उनकी जीत के लिए बधाई देते हुए कहा कि यह एक कठिन राजनीतिक परिस्थिति थी, लेकिन वे आगे की रणनीति बनाने के लिए तत्पर हैं।
राजा वडिंग ने गिद्दड़बाहा से अपनी पत्नी अमृता वडिंग की हार पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि अकाली दल के उम्मीदवार की अनुपस्थिति और भाजपा उम्मीदवार मनप्रीत बादल के खराब प्रदर्शन ने चुनाव परिणामों को प्रभावित किया। उन्होंने आम आदमी पार्टी के सभी विजेता उम्मीदवारों को शुभकामनाएँ दीं और गिद्दड़बाहा से कांग्रेस के विजेता काला ढिल्लों को भी बधाई दी। अमरिंदर सिंह ने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान पार्टी ने पूरे प्रयास किए, परंतु परिणाम उनके पक्ष में नहीं आए।
इस दौरान, अमृता वडिंग ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने और उनके समर्थकों ने चुनाव में कोई कमी नहीं रखी। वे इस बात का दुख व्यक्त कर रही थीं कि 78 सालों में पहली बार गिद्दड़बाहा से एक महिला उम्मीदवार ने चुनावी मैदान में उतरकर अपनी भागीदारी निभाई। उन्होंने डिंपी ढिल्लों को जीत की बधाई देते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं और वोटरों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि इस पहले चुनाव से उन्हें कई महत्वपूर्ण सबक मिले हैं जो उन्हें भविष्य में और बेहतर तैयारी के लिए प्रेरित करेंगे।
अंत में, राजा वडिंग ने कहा कि हार से निराश होने का कोई कारण नहीं है, बल्कि यह उनके और पार्टी के लिए एक सीखने का अवसर है। कांग्रेस पार्टी आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है और वे 2027 में चुनावी रणनीतियों को और बेहतर बनाएंगे ताकि पार्टी की स्थिति मजबूत हो सके।









