फाजिल्का में मनरेगा मजदूरों का उग्र प्रदर्शन: सिर्फ 20 दिन मिला काम, संघर्ष की धमकी!
फाजिल्का में डीसी कार्यालय के बाहर मनरेगा मजदूरों ने अपने हक की लड़ाई के तहत प्रदर्शन किया। इन मजदूरों ने शिकायत की कि वित्तीय वर्ष 2023-24 में उन्हें केवल 20 दिन का काम ही दिया गया है, जिसके चलते उन्हें लगभग 50 लाख रुपये का नुकसान सहना पड़ा है। इसका प्रभाव अब वित्तीय वर्ष 2024-25 पर भी पड़ रहा है, क्योंकि इस वर्ष भी उन्हें केवल 20 दिन का काम मिला है। साथ ही, मजदूरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान जल्द नहीं किया गया, तो वे अपने संघर्ष को और बढ़ाने पर मजबूर होंगे।
मनरेगा मजदूर यूनियन के गांव बनवाला हनुवंता के अध्यक्ष ओम प्रकाश ने कहा कि उन्हें सामान्यतः 100 दिन का काम मिलता था, लेकिन पिछले कुछ समय से सिर्फ 20 दिन का काम ही उपलब्ध हो सका है। वर्तमान में उनके गांव में मनरेगा के लगभग 250 परिवार हैं, जिनमें से करीब 150 लोग काम कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन की लापरवाही के कारण उन्हें इस आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है और उन्हें उम्मीद है कि उनकी आवाज़ सुनी जाएगी।
मजदूरों ने कहा कि 2024-25 के कार्यकाल की शुरुआत हो चुकी है, मगर उन्हें अभी तक केवल 20 दिन का काम दिया गया है। अप्रैल 2024 में उन्होंने एक लिखित मांगपत्र भी अधिकारियों को सौंपा था, जिसमें उनकी मांगें स्पष्ट की गई थीं। हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने कई बार विभिन्न अधिकारियों के पास जाकर अपनी समस्याओं को साझा किया, लेकिन अभी तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हो सकी है।
आंदोलनकारी मजदूरों ने यह भी बताया कि न तो उन्हें नियमित काम मिल रहा है और न ही बेरोजगारी भत्ता, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है। प्रदर्शन में शामिल मजदूरों ने एकजुटता दिखाई और उनके बीच में एक ठोस संकल्प का माहौल था कि वे अपनी मांगों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। मनरेगा योजना का मकसद ग्रामीण रोजगार को बढ़ावा देना है, लेकिन मौजूदा स्थिति इस योजना की असफलता को दर्शाती है।
इन मजदूरों ने प्रशासन से अपील की है कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और जल्द से जल्द समाधान किया जाए। यदि उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो वे आगामी दिनों में अपने आंदोलन को और तेज करने की योजना बना रहे हैं। उनका कहना है कि वे अपने हक के लिए खड़े रहेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें कितनी भी चुनौतियों का सामना करना पड़े। ऐसे में यह देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कार्रवाई करता है, ताकि मजदूरों की समस्याओं का समाधान हो सके और उन्हें उचित काम मिल सके।









