ऑस्ट्रेलिया की झील हुई गुरु नानक के नाम, 6 लाख डॉलर का लंगर अनुदान!
ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य में सिख समुदाय को सम्मानित करते हुए बर्विक स्प्रिंग्स क्षेत्र की एक झील का नाम “गुरु नानक झील” रख दिया गया है। यह महत्वपूर्ण निर्णय गुरु नानक देव जी की 555वीं जयंती के अवसर पर लिया गया है, जो 15 नवंबर को मनाई जाएगी। इस समारोह के साथ ही विक्टोरियन मल्टीकल्चरल अफेयर्स मंत्री इंग्रिड स्टिट ने घोषणा की कि राज्य सरकार विक्टोरिया में विशेष लंगर समारोह के आयोजन के लिए 600,000 डॉलर का अनुदान भी प्रदान करेगी। यह कदम सिख समुदाय के प्रति सम्मान और उनके योगदान को मान्यता देने के लिए उठाया गया है।
इस नई पहल के अंतर्गत “नाम अ प्लेस” अभियान चलाया जा रहा है, जिसकी सहायता से बर्विक स्प्रिंग्स झील का नाम बदलकर “गुरु नानक झील” रखा गया है। यह अभियान विक्टोरिया सरकार द्वारा शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य समाज के अल्पसंख्यक समुदायों और उनके प्रमुख व्यक्तित्वों को सम्मानित करना है। गुरु नानक देव जी, जो सिख धर्म के संस्थापक हैं, के नाम पर झील का नामकरण सिख समुदाय के लिए गर्व और प्रेरणा का स्रोत है।
इस नामकरण की प्रक्रिया में विशेष योगदान देने वाले जसबीर सिंह सुरोपदा, जो विक्टोरिया के सिख इंटरफेथ काउंसिल के चेयरमैन हैं, ने 2018 से इस विषय पर राज्य के प्रधानमंत्री के साथ चर्चा की थी। उन्होंने बताया कि नई पहचान मिलने के बाद यह झील सरकारी गजटों और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में “गुरु नानक झील” के नाम से दर्ज की जाएगी। सुरोपदा ने यह भी कहा कि इस नामकरण से आजकल की पीढ़ी गुरु नानक जी और सिख धर्म के बारे में जानने के लिए प्रेरित होगी।
समारोह में भाग लेने वाले सिख समुदाय के लोग इस ऐतिहासिक क्षण का आनंद लेते हुए उपस्थित थे, जिसमें बुंनुरोंग समुदाय के अंकल मार्क ब्राउन ने “वेलकम टू कंट्री” समारोह की शुरुआत की। इस आयोजन ने सिख समुदाय के इतिहास और उनके योगदान को मान्यता देने के साथ-साथ विक्टोरिया के बहुसांस्कृतिक प्रदर्शन का हिस्सा भी बनाया।
विक्टोरिया में सिख समुदाय एक महत्वपूर्ण और तेजी से बढ़ता हुआ समूह है, जिसकी कुल संख्या 2,10,000 से अधिक है, जो ऑस्ट्रेलिया की कुल जनसंख्या का लगभग 0.8% है। विक्टोरिया राज्य में सिखों ने कई गुरुद्वारे स्थापित किए हैं और वे समाज में विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा, सिख समुदाय का योगदान व्यवसाय, कला, सैन्य और कई सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में भी देखने को मिलता है। यह नामकरण न केवल सिख समुदाय की पहचान को बढ़ावा देता है, बल्कि ऑस्ट्रेलियाई समाज में उनकी अहमियत को भी दर्शाता है।









