चंडीगढ़ में केंद्रीय मंत्री रवनीत बिट्टू की धान प्रबंधन पर अहम बैठक, FCI से खास चर्चा
चंडीगढ़ में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने आज एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें खाद्यान्न खरीद की समीक्षा की गई। यह बैठक भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के अधिकारियों के साथ संपन्न हुई। आज की चर्चा का मुख्य केंद्र पंजाब में धान प्रबंधन, खरीद और भंडारण से संबंधित मुद्दे थे। सम्मेलन का आयोजन चंडीगढ़ में किया गया और इसमें अधिकारियों के साथ यह भी बहस हुई कि केंद्र सरकार किसानों की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठा सकती है।
बिट्टू ने एक दिन पहले चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंजाब की आम आदमी पार्टी की सरकार पर तीखे हमले बोले थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में धान के भंडारण की कोई समस्या नहीं है, बल्कि असली समस्या यह है कि राज्य सरकार घटिया हाइब्रिड धान के बीज का प्रचार कर रही है। इसके नतीजे में मिलर्स धान खरीदने में संकोच कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के निर्णयों को गंभीरता से लेते हुए कहा कि ये फैसले पंजाब की कृषि व्यवस्था को बर्बाद कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में अनाज मंडियों में अधिक उत्पादन की कमी के लिए मुख्यमंत्री मान की सरकार जिम्मेदार है। बिट्टू ने आरोप लगाया कि कृषि पर आधारित राज्य पंजाब में सीएम मान की गलत नीतियों के कारण किसानों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना था कि यह स्थिति केवल किसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव आम जनता पर भी पड़ रहा है।
केंद्रीय मंत्री का बयान स्पष्ट करता है कि पंजाब की मौजूदा सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से न केवल农业 क्षेत्र की मजबूती को नुकसान हुआ है, बल्कि इससे राज्य की संपूर्ण आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हुई है। ऐसे में सरकार के पास आवश्यक है कि वह अपनी नीतियों में बदलाव करे और किसानों के हित में उचित निर्णय ले। बैठक में चर्चा के दौरान बिट्टू ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि किसान अपनी फसल को अच्छे दाम पर बेच सकें और आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें।
सारांश में, केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की बैठक और उनके दिए गए बयान से स्पष्ट है कि पंजाब में खाद्यान्न खरीद और प्रबंधन प्रणाली में सुधार की आवश्यकता है। घटिया बीजों की समस्या और नीतिगत गलतियों के कारण राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था बर्बादी की कगार पर है। इसलिए, सरकार को तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि किसान और आम जनता को राहत मिल सके और पंजाब की कृषि क्षेत्र को पुनर्जीवित किया जा सके।









