लुधियाना RTA ऑफिस के बाहर हंगामा: एजेंटों के झूठे वादों से परेशान लोग प्रदर्शन पर उतरे!

लुधियाना में आज परिवहन विभाग (RTA) दफ्तर के बाहर एक व्यक्ति ने जमकर हंगामा किया। हंगामा करने वाले व्यक्ति ने वहां उपस्थित एजेंटों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे लोगों के साथ जालसाजी कर रहे हैं। अचानक उठे इस शोर-शराबे को सुनकर RTA दफ्तर के कर्मचारी भी बाहर आए, लेकिन जैसे ही मामला एजेंटों पर आया, वे वापस अपने कार्यालयों में चले गए। इस घटना की जानकारी देते हुए किरपाल नगर एसोसिएशन के प्रधान रछपाल सिंह सिद्धू ने बताया कि उनके दामाद का चालान पिछले ढाई महीने पहले हुआ था।

सिद्धू ने बताया कि जब उनके दामाद ज्ञान सिंह चालान भरने के लिए RTA दफ्तर आए, तो उन्हें कुछ एजेंट मिले। एजेंटों ने उन्हें अपनी बातों में उलझाकर 2 से 2500 रुपए का भुगतान करवाने का प्रस्ताव दिया। बाद में पता चला कि एजेंटों ने उनके दामाद से करीब 2 हजार रुपए भी ले लिए, लेकिन आज तक उनका चालान भरा नहीं गया है। उन्होंने इस विषय पर एजेंट ममता और मनी से कई बार संपर्क किया, लेकिन पैसे लेने के बाद उन लोगों ने फोन तक नहीं उठाया। यह स्थिति देखकर सिद्धू भी काफी परेशान हो गए और इसलिए उन्होंने आज RTA दफ्तर के बाहर हंगामा करने का निर्णय लिया।

सिद्धू ने इस घटना को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर को इस स्थिति पर ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि आम नागरिकों को एजेंटों द्वारा ठगे जाने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि चालान भरने में आने वाली समस्याओं का फायदा उठाकर एजेंट भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। उनका आरोप है कि इन एजेंटों की गतिविधियों से न केवल आम लोगों की मेहनत की कमाई बर्बाद हो रही है, बल्कि इसे रोकने के लिए कोई ठोस कदम भी नहीं उठाए जा रहे हैं।

इस मामले में जब RTA के अधिकारी कुलदीप सिंह से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। यह अप्रत्याशित व्यवहार और RTA दफ्तर के भीतर फैले भ्रष्टाचार की पुष्टि करता है। सिद्धू जैसे अन्य लोग भी इस प्रणाली से निराश हैं और सुधार की मांग कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति न हो।

लुधियाना में इस प्रकार की घटनाएं न केवल शहर की छवि को धूमिल करती हैं, बल्कि नागरिकों के विश्वास को भी प्रभावित करती हैं। इस मुद्दे का समाधान निकालना जरूरी है ताकि लोगों को भरोसा हो कि वे अपने कानूनी मामलों में सही तरीके से सहायता प्राप्त कर सकें और जालसाजी से बच सकें। नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को इस दिशा में सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिल सकें और वे ठगी के शिकार न बनें।