पंजाब में 4 हाईवे बंद, किसान बोले- लिफ्टिंग शुरू होगी तभी खुलेंगे रास्ते!

पंजाब में धान की लिफ्टिंग नहीं होने के कारण किसान शनिवार को पूरे राज्य के चार हाईवे को बंद कर दिए हैं। ये किसान सड़कों पर 1 बजे से बैठ गए और उनका प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं। किसान संगठन, जैसे कि किसान मजदूर मोर्चा और किसान संयुक्त मोर्चा नॉन (पॉलिटिकल) जॉइंट फोरम के नेता सरवन सिंह पंधेर ने जानकारी दी कि इस विरोध प्रदर्शन का एकमात्र उद्देश्य अपनी समस्याओं को सरकार के समक्ष उजागर करना है। किसान इस बात से नाखुश हैं कि केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से उनकी समस्याओं पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है।

पंधेर ने बताया कि फूड सप्लाई मंत्री के साथ शैलरों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसमें शैलरों ने यह मुद्दा उठाया कि धान की फसल में से चावल निकलने की कमी है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि उन्हें इस स्थिति में 2-3 किलो की अधिक छूट दी जाए, ताकि वे अपनी परेशानियों का सामना कर सकें। हालांकि, पंधेर ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार ने जल्दी टीमें भेजने का वादा किया था, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं आया है। इसके चलते शैलरों ने धान की लिफ्टिंग भी नहीं की है, जिससे किसान पिछले 26 दिनों से मंडियों में अनिश्चित स्थिति में बैठे हैं और अपने जीवनयापन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

इस बीच, पंधेर ने भाजपा के तीन काले कानूनों को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ये कानून किसानों के हित में नहीं हैं और यदि भाजपा के नेता पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, जो वर्तमान में भाजपा में हैं, तो उन्हें प्रधानमंत्री से बातचीत कर इस समस्या का समाधान निकालने का प्रयास करना चाहिए। पंजाब के मुख्यमंत्री, अरविंद केजरीवाल, भी आज दिल्ली जा रहे हैं और पंधेर ने उनसे उम्मीद जताई है कि वे किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेकर सरकार के समक्ष उठाएँगे। अन्यथा, किसान समुदाय ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें अनसुनी रही तो सम्पूर्ण पंजाब बंद हो जाएगा।

किसानों ने यह संदेश भी दिया है कि उनका आंदोलन सिर्फ एक आर्थित संकट का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह पंजाब की समग्र अर्थव्यवस्था से जुड़ा हुआ है। पंधेर का कहना है कि यदि किसान खत्म होते हैं तो पंजाब की पहचान और उसकी अर्थव्यवस्था भी समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि आज सड़कों पर रुकावट आएगी, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि इससे समस्याओं का हल निकल सकेगा। यदि ऐसा नहीं होता है तो राज्य में आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित होंगी, बड़े-बड़े मॉल खुलेंगे और छोटे उद्योग बंद होंगे, जिससे व्यापार का नहीं रह जाएगा।

हालांकि, इस बंद के दौरान इमरजेंसी सेवाओं और एयरपोर्ट के यात्रियों को किसी भी तरह की कठिनाई का सामना नहीं करने दिया जाएगा। किसानों ने लोगों से अपील की है कि वे उनके समर्थन में आएं और इस महत्वपूर्ण मुद्दे के समाधान में मदद करें। वे आशा करते हैं कि जल्द ही उनकी आवाज़ सुनी जाएगी और सकारात्मक नतीजे सामने आएंगे।