पंजाब में प्रदूषण खतरे में: अमृतसर AQI 260, 397 अफसरों को पराली पर नोटिस!

पंजाब और चंडीगढ़ में मौसम की गतिविधियाँ लगातार बदल रही हैं। पिछले 24 घंटे में यहां का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 2.8 डिग्री अधिक रहा है लेकिन अब रात के समय ठंडक महसूस होने लगी है। फरीदकोट जिले में तापमान 36 डिग्री तक पहुँच गया है, जो इस राज्य का सबसे गर्म स्थान है। इसके साथ ही वायु प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है, जो गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस स्थिति पर ध्यान देते हुए उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है, जो पराली जलाने की घटनाओं पर उचित नियंत्रण करने में असमर्थ रहे हैं। 397 नोडल अधिकारियों और पर्यवेक्षकों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें उनसे पूछा गया है कि उन्होंने सूचना मिलने के बावजूद समय पर कार्यवाही क्यों नहीं की।

इस साल राज्य में 108 स्थानों पर पराली जलाने की घटनाएँ सामने आई हैं, जिससे वायु गुणवत्ता पर प्रतिकूल असर पड़ा है। उदाहरण के लिए, अमृतसर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 260 दर्ज किया गया, जो बहुत ही चिंता का विषय है। हालांकि, चंडीगढ़ और अन्य शहरों में थोड़ी राहत की बात यह है कि वहां का AQI स्तर कम हो रहा है। मंडी गोबिंदगढ़ में AQI 211, बठिंडा में 123, जालंधर में 169, खन्ना में 136, लुधियाना में 155, पटियाला में 154 और रूपनगर में 144 है। चंडीगढ़ में तीन विभिन्न स्थानों पर AQI का आकलन किया गया है, जिसमें सेक्टर-22 का AQI 134, सेक्टर-25 का AQI 116 और मोहाली सटे सेक्टर-53 का AQI 160 दर्ज किया गया है।

पंजाब के प्रमुख शहरों में मौसम की स्थिति सामान्य बनी हुई है। चंडीगढ़ में शनिवार को अधिकतम तापमान 33.6 डिग्री सेल्सियस रहा। आज का मौसम साफ रहने का अनुमान है, और तापमान 18.0 से 31.0 डिग्री के बीच रहने की संभावना है। अमृतसर में शनिवार को अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री सेल्सियस रहा, वहीं जालंधर में यह 33.0 डिग्री तक पहुँच गया। पटियाला ने अधिकतम तापमान 34.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया है।

मोहाली में अधिकतम तापमान शनिवार को 34.1 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि लुधियाना में यह 33.6 डिग्री पर स्थिर रहा। आज लुधियाना में बादल छाने का अनुमान है, और तापमान 17 से 33 डिग्री के बीच रहेगा। इस प्रकार, मौसम में छोटे-मोटे बदलाव चल रहे हैं, लेकिन सामूहिक रूप से रात की ठंडक और दिन के गर्म तापमान का संतुलन बना हुआ है।

इन परिस्थितियों में, स्थानीय प्रशासन और पर्यावरण अधिकारियों पर जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वे प्रदूषण नियंत्रण में सख्त कदम उठाएं और पराली जलाने की घटनाओं को रोका जाए। वायु गुणवत्ता में सुधार हेतु ठोस उपायों की आवश्यकता है, ताकि नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य का अनुभव हो सके।