लुधियाना मेला बना अपराध का अखाड़ा: तीन दिन में लूट की घटनाओं की बाढ़!

फेस्टिवल सीजन की शुरुआत होते ही लुधियाना शहर में कई स्थानों पर मेले आयोजित किए गए हैं, जहां पर परिवार सहित बच्चे भी बड़ी संख्या में आ रहे हैं। लेकिन इन मेलों की सुरक्षा को लेकर मेला प्रबंधकों और पुलिस की लापरवाहियों ने चिंता का विषय बना दिया है। पिछले तीन दिनों में मेले के आस-पास छीनाझपटी की कई घटनाएं हुई हैं, जिससे जाहिर होता है कि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से नाकाफी है। इन मेलों का संचालन देर रात तक बिना किसी सुरक्षा की उपस्थिति के जारी है, जिससे अपराधियों के लिए भी ये मौका उपलब्ध रहता है।

लुधियाना में दरेसी, दुर्गा माता मंदिर के सामने, वर्धमान मिल, और प्वेलियन मॉल के पास जैसे विभिन्न स्थानों पर मेले सजाए गए हैं। जहां हर रात हजारों की तादाद में लोग आते हैं। रात 12 बजे तक ये मेले भरे रहते हैं, लेकिन सुरक्षा के लिए न तो प्रबंधक गंभीर हैं और न ही पुलिस। हाल के दिनों में दरेसी, दुर्गा माता मंदिर, और दुगरी जैसे स्थानों पर छीनाझपटी की घटनाएं सामने आई हैं। इसके अलावा, पार्किंग की कमी और मनमाने पार्किंग शुल्क के लिए भी लोगों को लूटा जा रहा है, जिससे मेले की आनंददायी भावना पर असर पड़ा है।

जिलाधिकारी जतिंदर जोरवाल ने बताया कि मेलों की सुरक्षा व्यवस्था में जो भी खामियाँ हैं, उनकी जांच करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी और सुरक्षा को लेकर पुलिस को दिशा-निर्देश भी प्रदान किए जाएंगे। हालांकि, जब मेले के प्रबंधकों से बात करने की कोशिश की गई, तो वारिन्दर कपूर और अशोक कुमार जैसे अधिकारियों ने संपर्क का कोई उत्तर नहीं दिया और फोन काट दिया।

डीसीपी शुभम अग्रवाल ने जानकारी दी कि मेले के संचालन के लिए एक फिक्स समय निर्धारित किया जाएगा, ताकि लोग रात देर तक न घूमें। पुलिस को भी ये हिदायत दी गई है कि वे मेलों के संबंध में सुरक्षा संबंधी सभी उपाय सुनिश्चित करें। बावजूद इसके, यह चिंताजनक है कि मेलों में न तो मेटल डिटेक्टर हैं और न ही फायर ब्रिगेड की कोई गाड़ी उपलब्ध है।

आगामी 18 अक्तूबर तक ये मेले चलेंगे, इसके बाद दीवाली के अवसर पर और बड़े मेलों का आयोजन होगा। ऐसे में यह देखना होगा कि क्या प्रशासन और मेला प्रबंधक सुरक्षा व्यवस्था में सुधार लाने को तैयार हैं और क्या वे स्थानीय लोगों की सुरक्षा को गंभीरता से लेंगे। लुधियाना के नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना बेहद आवश्यक है, ताकि फेस्टिवल सीजन का आनंद बिना किसी चिंता के लिया जा सके।