लखनऊ ED की धड़कन: मनी लॉन्ड्रिंग में 23.13 करोड़ की संपत्ति जब्त!

पंजाब में आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के अंतर्गत ईडी ने होशियारपुर, फतेहगढ़ साहिब और मोहाली में मेसर्स मूनलाइट प्रॉपबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स एल्को ग्लोबल वेंचर्स एलएलपी के नाम पर कुल मिलाकर लगभग 23 करोड़ रुपये की संपत्ति को जब्त किया है। यह संपत्तियां कृषि भूमि और औद्योगिक भूखंडों के रूप में वर्गीकृत की गई हैं। जब्त की गई संपत्तियों की कुल मार्केट वैल्यू 23.13 करोड़ रुपये बताई जा रही है, जिसमें कुल 5 अचल संपत्तियां शामिल हैं।

ईडी ने बताया कि यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के तहत की गई है। यह कार्रवाई इलाहाबाद उच्च न्यायालय के निर्देश पर की गई है, जिसमें मेसर्स हैसिंडा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (एचपीपीएल), उसके प्रमोटर और अधिकारियों सहित कई अन्य पर आरोप लगाए गए हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने घर खरीदारों की धनराशि को धोखाधड़ी से हासिल किया है और उन्हें वादा किए गए फ्लैट उपलब्ध नहीं कराए हैं।

इस जांच के दौरान, ईडी को पता चला है कि एचपीपीएल द्वारा नोएडा के सेक्टर 107 में लोटस 300 परियोजना का संचालन 2010-11 में शुरू किया गया था। इसी समय बिल्डर द्वारा खरीदारों के साथ समझौते भी किए गए थे। इससे पहले सितंबर के महीने में ईडी ने मेसर्स थ्री सी ग्रुप के प्रमोटरों और निदेशकों से जुड़े परिसरों में तलाशी अभियान चलाया था, जिसमें 42 करोड़ रुपये की नकदी, हीरे, आभूषण और आपत्तिजनक दस्तावेज़ बरामद किए गए थे।

अधिकारियों का कहना है कि मेसर्स थ्री सी यूनिवर्सल डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को जो फंड दिए गए थे, उसमें से अधिकांश धनराशि मेसर्स मूनलाइट प्रॉपबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स एल्को ग्लोबल वेंचर्स एलएलपी जैसी विभिन्न समूह कंपनियों को असुरक्षित ऋण के रूप में जारी की गई थी। इस तरह की वित्तीय गतिविधियों ने सामने आने के बाद जांच को और तेज कर दिया है, ताकि ऐसे अपराधियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जा सके।

इस मामले ने एक बार फिर से देश में संपत्ति से जुड़े धोखाधड़ी के मामलों की गंभीरता को उजागर किया है। ईडी द्वारा की गई यह कार्रवाई उन निवेशकों के लिए सख्त संदेश है जो संपत्ति क्षेत्र में सुरक्षा की कमी के चलते धोखा खा जाते हैं। ईडी के किसी भी मामले में खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए लगातार सक्रिय रहने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सके।