जगराओं में किसानों का उग्र प्रदर्शन: धान लिफ्टिंग के लिए हाईवे जाम!
जगराओं की अनाज मंडी, जो एशिया की दूसरी सबसे बड़ी है, में धान की लिफ्टिंग न होने के चलते किसानों का धैर्य टूट गया है। खरीद प्रक्रिया में बाधा के कारण किसानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इसके परिणामस्वरूप, लुधियाना फिरोजपुर हाईवे पर किसानों ने चक्का जाम करने का निर्णय लिया, जिससे उन्होंने एक लंबे समय तक धरना दिया। यह धरना सुबह 11 बजे शुरू होकर दोपहर 3 बजे तक चला, जिसके कारण हाईवे पर यातायात ठप हो गया। इस दौरान, दूसरे रास्तों से यात्रा करने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, और कई बड़े वाहन चालक भी वहीं हाईवे पर घंटों इंतजार करते रहे।
किसानों ने धरने से पूर्व आने-जाने वाले लोगों से माफी मांगी थी, जबकि उनकी मुख्य मांग सरकार से है कि जगराओं मंडी और आसपास की अन्य मंडियों में 8 लाख धान की बोरी की लिफ्टिंग जल्दी की जाए। उनका तर्क है कि अगर लिफ्टिंग नहीं होती है, तो मंडी में फसल उतारने के लिए उन्हें जरूरी जगह नहीं मिल सकेगी। किसान संगठनों ने यह स्पष्ट किया कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे आगे भी इसी प्रकार के आंदोलन जारी रख सकते हैं।
इस धरने में विभिन्न किसान संगठनों का योगदान देखा गया, जिसमें भारतीय किसान यूनियन लखोवाल, किरती किसान यूनियन, जम्हूरी किसान सभा, मजदूर यूनियन, आढ़ती एसोसिएशन और न्यायप्रिय लोग शामिल हुए। इन संगठनों के सदस्य धरने में भारी संख्या में जुटे थे, जो इस समस्या के समाधान के लिए एकजुटता दिखा रहे थे। जिला सचिव इंद्रजीत सिंह धालीवाल ने बताया कि इस आंदोलन का मकसद केवल अपनी मांगों को उठाना नहीं, बल्कि सभी किसानों की समस्याओं के प्रति ध्यान आकर्षित करना है।
किसानों के इस आंदोलन से यह स्पष्ट होता है कि सरकार को किसानों की देखभाल और उनकी परेशानियों को गंभीरता से लेना होगा। यदि समय पर उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह स्थिति और भी बिगड़ सकती है और किसानों का गुस्सा बढ़ता ही जाएगा। ऐसे समय में जब देश में कृषि संकट के मुद्दे पर चर्चा हो रही है, यह आंदोलन एक जागरूकता का संकेत है कि किसानों को उनकी मांगों के लिए संघर्ष करना होगा।
इसी के साथ, किसानों की एकजुटता यह दर्शाती है कि वे अपनी समस्याओं को हल करने के लिए एकजुट हैं और यह उनके अधिकारों की लड़ाई है। ऐसे में यह देखना होगा कि सरकार उनकी इस मांग पर त्वरित कार्रवाई करती है या नहीं। यदि सरकार इस मुद्दे पर कड़ी भूमिका नहीं निभाती है, तो आगे आने वाले समय में ऐसी घटनाएँ और भी बढ़ सकती हैं। इसलिए यह जरूरी है कि सरकार किसानों की समस्याओं को हल करते हुए उनके सामने लिफ्टिंग प्रक्रिया को तुरंत लागू करे।









