फाजिल्का मंडी में हंगामा: धान नहीं खरीदी, पानी की किल्लत, शौचालय बदहाल!

फाजिल्का की अनाज मंडी में धान की खरीद का सीजन शुरू हो चुका है, लेकिन आज अचानक किसानों ने विभिन्न जत्थेबंदियों के रूप में मंडी में हंगामा कर दिया। इन किसानों ने मंडी के विभिन्न हिस्सों का दौरा करते हुए अव्यवस्थाओं को उजागर किया। उनका आरोप है कि मंडी में न तो पानी पीने की उचित व्यवस्था है और न ही शौचालयों की स्थिति ठीक है। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि किसानों की फसल की खरीद नहीं हो रही है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है। भाकियू कादियां के प्रेस सचिव मास्टर बूटा राम और भाकियू लक्खोवाल के जिला अध्यक्ष प्रहलाद सिंह ने मिलकर किसानों के साथ मंडी का निरीक्षण किया और हालात को देखने के बाद ये सभी बातें सामने आईं।

किसानों ने बताया कि पिछले 10 से 12 दिनों से वे अपनी फसल लेकर मंडी में बैठे हुए हैं लेकिन कोई भी खरीदार नहीं आ रहा है। उनका कहना है कि धान सूख रहा है, फिर भी उन्हें उचित कीमत नहीं मिल रही है। किसानों का आरोप है कि उनकी फसल चुराई जा रही है और मंडी में इकट्ठे किए गए झार के बीच उनकी फसल को चोरी कर लिया जा रहा है। बाद में यह धान बिना लाइसेंस चलते दुकानों पर बेचा जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वे पहले ही जिला प्रशासन को इस समस्या के बारे में अवगत करा चुके हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।

इस विवाद पर मंडी के सुपरवाइजर राजकुमार ने बताया कि मंडी की सफाई का काम रोजाना किया जा रहा है लेकिन फसल की आमद के कारण झार इकट्ठा हो जा रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क पर जमा हुए झार को मशीनों के माध्यम से साफ किया जा रहा है। इसके साथ ही, उन्होंने पुष्टि की कि पीने के पानी और शौचालयों की व्यवस्था मंडी में की गई है। लेकिन बिना लाइसेंस की दुकानों पर बिक रहे धान के मामले में कार्रवाई करने का आश्वासन भी दिया।

किसानों का गुस्सा और उनकी चिंताएं उनकी स्थिति को और गंभीर बना रही हैं। उन्हें उचित मूल्य नहीं मिलने, फसल की चोरी और अव्यवस्थाओं के खिलाफ अपनी आवाज उठानी पड़ रही है। किसानों ने जिला प्रशासन से उचित कार्रवाई की मांग की है। इस घटना ने एक बार फिर से स्पष्ट कर दिया है कि कृषि क्षेत्र में सुधार की कितनी आवश्यकता है। किसानों की समस्या का समाधान न होना न केवल उनके लिए बल्कि समग्र कृषि क्षेत्र के लिए चिंताजनक है, जिससे उनकी मेहनत और सपनों को क्षति पहुँच रही है।