भाकपा – माले में मासस के विलय से इंडी गठबंधन की ताकत बढ़ी

भाकपा – माले में मासस के विलय से इंडी गठबंधन की ताकत बढ़ी

गिरिडीह, 12 सितंबर (हि.स.) । झारखंड की सियासत इन दिनों विधानसभा चुनाव 2024 के रंग में है। इंतजार केवल मतदान की तारीखों के एलान का है। आसन्न चुनाव को लेकर केन्द्र में तीसरी बार सत्ता में आई एनडीए झारखंड में सत्ता वापसी के लक्ष्य को लेकर रणनीति पर काम कर रही है।

दूसरी और इंडी गठबंधन के समक्ष राज्य में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में चल रही सत्ता बरकरार रखने की चुनौती है। इस बीच मार्क्सवादी समन्वय समिति ( मासस ) का भाकपा – माले में विलय से झारखंड में वामदलों ने अपनी ताकत बढ़ाली है। वामपंथ की ताकत बढ़ने से उत्तरी छोटानागपुर के धनबाद और गिरिडीह जिले मे कुल छह विधानसभा सीटों पर इंडी गठबंधन को नई ताकत मिली है ।

इन दोनों जिलों में मासस और माले का सांगठनिक ढांचा काफी मजबूत होने से कई सीटों पर अच्छा खासा प्रभाव रहा है। हालांकि धनबाद जिले में मासस का कोई विधायक नहीं है। लेकिन निरसा और सिंदरी मासस का अपना परम्परागत जनाधार रहा है। दोनों सीटों पर मसस प्रत्याशी की जीत हार होती रही है। इसी प्रकार गिरिडीह जिले की बगोदर और धनवार सीट का भी ऐसा ही चुनावी इतिहास रहा है। बगोदर सीट पर 2014 को छोड़कर कर अब तक के हुए चुनावों में पहले स्व महेन्द्र सिंह और वर्तमान में विनोद कुमार सिंह विद्यायक है। धनवार सीट पर भी भाकपा – माले के पूर्व विधायक राज कुमार यादव की जीत हार होती रही है। गिरिडीह जिले की एक अन्य सीट गाण्डेय पर भी माले प्रत्याशी को सम्मान जनक वोट प्राप्त होते रहे है।

जानकारो के मुताविक दोनों वादलों के मिलन के बाद गिरिडीह – धनबाद की कम से कम दस सीटों पर इंडी गठबंधन की ताकत बढ़ी है। जिसका लाभ विधानसभा चुनाव 2024 में इंडि ब्लोक के प्रत्याशियो को मिलना लगभग तय है ।

राजनीतिक जानकाराें का कहना है कि ये दोनों जिले कोयला और अबरख उद्योग से जुडे होने के कारण मजदूर आंदोलन के गढ़ रहे है, जिसका नेतृत्व एके राय , गुरुदास चटर्जी , विनोद मिश्र , चतुरानन मिश्र और महेन्द्र सिंह सरीखे वामपंथी नेता करते रहे है। दोनों दलों के विलय के संदर्भ में विधायक विनोद सिंह , पूर्व विधायक अरूप चटर्जी का कहना है कि दोनों वामदलो की विचारधारा समान रही है । श्रमिक आंदोलन और पृथक झारखंड आंदोलन के संघर्ष में दोनों दलों की सक्रिय भूमिका सड़क से सदन तक रही है।

दाेनाें का मानना है कि झारखंड हित में दोनो दलों का मिलन न सिर्फ महत्वाकांक्षी कदम है बल्कि दोनों दलों के कांतिकारी संघर्षो को अब आगे बढ़ाने मे और मदद मिलेगी । विस चुनाव को लेकर बदली हुई सियासी परिस्थितियों में हलाकि दोनों नेताओ ने स्पष्ट किया कि सीट शेयरिंग मे किसी प्रकार की रार नहीं होगी । इंडी गठबंधन की बैठक में मिल बैठकर तय कर लेंगे । लेकिन पार्टी सूत्रों का मानना है कि विलय के बाद भाकपा-माले माले गिरिडीह और धनबाद की कुल पांच सीटों की मांग कर सकती है । इसमें गिरिडीह की धनवार और बगोदर एवं धनबाद की निरसा , सिदरी , व चंदन क्यारी शामिल है । अगर पांच पर सहमति नहीं बनी तो धनवार , बगोदर , निरसा और सिंदरी पर दबाव बनायेगी ।

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