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शहडोल: ‘डायन माता’ से मन्नत मांगने के लिए भक्त लाल कपड़ों में बांधते हैं नारियल, नवरात्रि में उमड़ रही भीड़

शहडोल, 19 अक्टूबर । मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के घने जंगलों के बीच एक अनोखा आस्था केंद्र है, जहां देवी की पूजा डायन माता और खूनी माता के नाम से की जाती है। मंदिर परिसर में लाल कपड़ों में बंधे हजारों नारियल श्रद्धालुओं की मन्नतों की गवाही देते हैं।

स्थानीय लोगों का मानना है कि करीब चार दशक पहले एक विशाल बरगद के पेड़ के नीचे पशुओं की सलामती के लिए शुरू हुई प्रार्थना से इस जगह की मान्यता बढ़ी। आज चैत्र और शारदीय नवरात्रि में यहां दूर-दूर से भक्तों का तांता लगता है।

जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर बुढ़ार जनपद पंचायत के भैंसाताल गांव में जंगलों के बीच यह धाम मौजूद है। स्थानीय बुजुर्ग बताते हैं कि करीब चार दशक पहले यहां छोटी-छोटी बस्तियां हुआ करती थीं और लोग खेती-पशुपालन पर निर्भर थे। जंगल में चरने गए पशु जब अक्सर गायब होने लगे, तो परेशान ग्रामीणों ने बरगद के पेड़ के नीचे मन्नत मांगना शुरू किया। इसके बाद गायब पशु सुरक्षित मिलने लगे और यहीं से माता के प्रति लोगों का अटूट विश्वास बन गया। इस धाम की सबसे खास बात यह है कि यहां चारों तरफ लाल कपड़े में बंधे नारियल नजर आते हैं। श्रद्धालु अपनी अर्जी लेकर आते हैं और नारियल को कपड़े में बांधकर परिसर में टांग देते हैं।

मान्यता है कि मन्नत पूरी होने पर भक्त दोबारा आकर अपना नारियल खोलते हैं। लोग यहां गुम हुए पशुओं की तलाश, चोरी का सामान मिलने, संतान प्राप्ति और बच्चों की पढ़ाई में सफलता जैसी कामनाएं लेकर पहुंचते हैं।

चैत्र और शारदीय नवरात्रि के दौरान डायन माता धाम में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता है। शहडोल, अनूपपुर और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग यहां माथा टेकने आते हैं। स्थानीय परंपरा के मुताबिक कुछ श्रद्धालु यहां बलि भी चढ़ाते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पंचायत ने गांव से मंदिर तक जाने के लिए कच्ची सड़क बनवा दी है। जंगल के बीच स्थित यह धाम आज भी अंचल में अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है।