जेएनयू प्रकरण पर कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी को लेकर भाजपा ने उठाए सवाल
देहरादून, 09 अक्टूबर । भाजपा ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के प्रोफेसर एवं मणिपुर से कांग्रेस सांसद डॉ. अंगोमचा बिमोल अकोइजम पर लगे कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर कांग्रेस नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। भाजपा की प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत ने कांग्रेस पर महिला सुरक्षा और सम्मान के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए पार्टी नेतृत्व से सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की है।
पार्टी मुख्यालय में शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों और सम्मान की बात करने वाली कांग्रेस को अपने नेताओं से जुड़े गंभीर आरोपों के मामलों में भी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला सुरक्षा का मुद्दा केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और पीड़ितों को न्याय दिलाने के प्रति प्रतिबद्धता भी दिखाई देनी चाहिए।
प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत ने कहा कि जेएनयू में छात्राओं की ओर से लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के आरोप गंभीर हैं। उन्होंने दावा किया कि विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद कार्रवाई की गई है। उन्होंने इस मामले में जांच के निष्कर्षों और संबंधित कार्रवाई को गंभीरता से लेने की बात कही।
भाजपा प्रदेश महामंत्री ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के महिला अधिकारों से जुड़े नारे का उल्लेख करते हुए सवाल किया कि इस मामले में कांग्रेस नेतृत्व अपना रुख कब स्पष्ट करेगा। उन्होंने राहुल गांधी और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी इस प्रकरण पर जवाब देने की मांग की।
रावत ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के राजनीतिक पद या संगठन से जुड़े होने के आधार पर महिलाओं से संबंधित गंभीर आरोपों की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से संबंधित सांसद के मामले में स्पष्ट रुख अपनाने, सांगठनिक स्तर पर उचित कार्रवाई करने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
उन्होंने कहा कि महिला सम्मान किसी राजनीतिक दल का मुद्दा मात्र नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस विषय पर सभी राजनीतिक दलों को समान मानदंड अपनाने चाहिए।
भाजपा की प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत ने ये आरोप और मांगें पार्टी की ओर से रखीं। मामले से जुड़े आरोपों, जांच के निष्कर्षों और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।










