उदयपुर महिला अधिकार मंच की युवतियों से सीजेपी कार्यकर्ता ने की धक्का-मुक्की, पोस्टर छीने
उदयपुर, 04 अक्टूबर । महिला सुरक्षा के मुद्दे को लेकर रविवार को उदयपुर में आयोजित सार्वजनिक मार्च के दौरान विवाद की स्थिति बन गई। कार्यक्रम में ‘उदयपुर महिला अधिकार मंच’ की कार्यकर्ता भी कॉर्डिनेटर करिश्मा के नेतृत्व में शामिल हुईं। मंच की युवतियां नीरजा भनोत, किरण कुंवर के चित्र और “मेवाड़ का स्वाभिमान-जौहर का सम्मान” जैसे स्लोगन वाले पोस्टर लिए हुई थीं।
आरोप है कि मार्च के दौरान कॉकरोच पार्टी के पुरुष कार्यकर्ता चिराग खण्डेलवाल ने युवतियों से धक्का-मुक्की की और उनके पोस्टर छीन लिए। चिराग ने दावा किया कि मार्च उनके तय नियमों के अनुसार ही निकाला जाएगा। मौके पर मौजूद पुलिस ने तुरंत बीच-बचाव कर दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति संभाली।
घटना पर मंच की सेक्रेटरी रीना ने कड़ा रोष जताते हुए कहा कि महिला सुरक्षा के मंच पर युवतियों के साथ पुरुष कार्यकर्ता द्वारा की गई धक्का-मुक्की हैरान करने वाली है। इसके साथ ही उन्होंने महिला न्याय व अधिकारों से जुड़े विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर बयान जारी किया। रीना ने पहचान छिपाकर युवतियों को प्रेमजाल में फंसाने और जबरन मतांतरण (ग्रूमिंग गैंग) के विरुद्ध सख्त कानून बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को किसी भी मजहब की आबादी बढ़ाने का माध्यम बनाना निंदनीय है। उन्होंने दक्षिण राजस्थान में नाता प्रथा के दुरुपयोग, बहुविवाह और आधुनिकता के नाम पर लिव-इन रिलेशनशिप के कारण महिलाओं के हो रहे शोषण पर चिंता जताई। रीना ने मांग की कि लिव-इन संबंधों का अनिवार्य पंजीकरण हो ताकि पुरुषों की जवाबदेही तय हो सके। साथ ही, सभी महिलाओं के समान अधिकारों के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को जरूरी बताया।
परिवार व्यवस्था के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि ‘माय लाइफ, माय चॉइस’ जैसी पश्चिमी सोच को बेटियों पर थोपकर उन्हें परिवार के खिलाफ नहीं भड़काया जाना चाहिए। पिता की चिंता को पाबंदी के रूप में प्रचारित करना गलत है; परिवार ही बेटियों का सबसे बड़ा संबल होता है।










