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खनन क्षेत्र घोषित करने की शक्ति जिलाधिकारी को सौंपने की अधिसूचना वैध करार, याचिका खारिज

प्रयागराज, 30 सितंबर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ई-टेंडर/ई-नीलामी के लिए खनन क्षेत्र घोषित करने की शक्ति जिला अधिकारी को सौंपने की राज्य सरकार की 5नवंबर 25 की अधिसूचना की चुनौती याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने अंशिका सिंह की याचिका पर दिया है।

याची का कहना था कि उत्तर प्रदेश लघु खनिज (रियायत) नियमावली, 2021 के नियम 23(1) के तहत नीति-निर्माण की मूल शक्ति राज्य सरकार के पास है, जिसे नियम 73 के जरिए किसी अन्य को नहीं सौंपा जा सकता। उनका तर्क था कि खनिज अधिनियम की धारा 15 के तहत बनी नियमावली स्वयं प्रत्यायोजित विधान है, इसलिए उसमें और उप-प्रत्यायोजन नहीं हो सकता। उन्होंने यह भी कहा कि नीलामी के लिए खनन क्षेत्र घोषित करना नीतिगत निर्णय है।

अपर महाधिवक्ता कार्तिकेय सरन ने खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 26(2) और 28(3) का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार शक्ति सौंप सकती है, बशर्ते आदेश विधानमंडल के सदनों के समक्ष रखा जाए। उन्होंने 24 सितंबर 2026 को दस्तावेज सौंपकर दिखाया कि राज्यपाल ने प्रत्यायोजन का आदेश पारित किया, उसे अधिसूचित किया गया और सदनों के समक्ष रखा गया।

खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता जिस बिंदु का सहारा ले रहा है, वह उसमें कहा ही नहीं गया। सुप्रीम कोर्ट ने केवल यह कहा था कि खनिज पट्टे किस तरीके से दिए जाएं, यह तय करना राज्य सरकार का नीतिगत अधिकार है, पर निर्णय अधिनियम और नियमों के अनुरूप होना चाहिए और वह न्यायिक समीक्षा के दायरे में है।अदालत ने स्पष्ट किया कि उसे यह तय करने की जरूरत नहीं कि क्षेत्र घोषित करने की शक्ति सौंपना नीति-निर्माण का प्रत्यायोजन है या नहीं, क्योंकि प्रक्रिया संबंधी नियम सरकार के नीतिगत निर्णय के अनुरूप ही बने हैं।

कोर्ट के अनुसार नियम 23(1) राज्य सरकार को सामान्य या विशेष आदेश से भू-निर्देशांक सहित क्षेत्र घोषित करने की शक्ति देता है, जबकि नियम 23(4) जिला अधिकारी को घोषित क्षेत्र के संबंध में आगे की कार्रवाई की शक्ति देता है।