राजगढ़ः मातृ मृत्यु रोकने स्वास्थ्यकर्मियों को सिखाए आपात प्रसव के गुर
राजगढ़, 19 सितम्बर । मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए प्रसव कक्ष और डिलीवरी वार्ड में तैनात स्वास्थ्यकर्मियों को उच्च दक्षता का प्रशिक्षण दिया गया। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) के तकनीकी सहयोग से आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण के समापन अवसर पर शनिवार को जिले के विभिन्न डिलीवरी पॉइंट से आए नर्सिंग स्टाफ और स्वास्थ्यकर्मियों ने हिस्सा लिया।
प्रशिक्षण में जटिल प्रसव के दौरान तत्काल निर्णय लेने और सुरक्षित प्रसव कराने की तकनीकों का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। प्रशिक्षण के दौरान विषय विशेषज्ञ डॉ. रश्मि और डॉ. कीर्तना ने प्रसव के दौरान तथा प्रसव के तुरंत बाद होने वाली गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं से निपटने के तरीके बताए। डमी मॉडल और प्रैक्टिकल डेमो के माध्यम से स्वास्थ्यकर्मियों को आपात परिस्थितियों में अपनाई जाने वाली प्रक्रियाओं का अभ्यास कराया गया। केस स्टडी के जरिए भी प्रसव प्रबंधन की बारीकियां समझाई गईं।
प्रशिक्षण के दौरान मुख्य चिकित्सा एवं जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शोभा पटेल ने स्वास्थ्यकर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी डिलीवरी पॉइंट का स्टाफ प्रशिक्षण में बताई गई तकनीकों को गंभीरता से समझे और अपनी कार्यकुशलता बढ़ाए। प्रसव के दौरान अचानक आने वाली परेशानियों को सही कौशल और समय पर निर्णय लेकर नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग आगे भी ऐसे कौशल-विकास प्रशिक्षण आयोजित करेगा।
यूएनएफपीए की जिला समन्वयक डॉ. नेहा पांडे ने बताया कि चालू वर्ष में जिले में मातृ मृत्यु के 5 मामले सामने आए हैं। इनमें कुछ मौतें स्वास्थ्य संस्थाओं में हुईं। मामलों की समीक्षा में सामने आया कि कुछ परिस्थितियों में समय पर उचित चिकित्सीय निर्णय लिया जाता तो मौतों को टाला जा सकता था। इसी कमी को दूर करने के उद्देश्य से प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इसका मुख्य लक्ष्य डिलीवरी पॉइंट पर तैनात स्टाफ को आपात स्थिति में बिना देरी सही कदम उठाने के लिए दक्ष बनाना रहा।









