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प्राचीन काल से रहे हैं मनुष्य और प्रकृति के बीच गहरे संबंध : कुलगुरु मनोज दीक्षित

कुलगुरु मनोज दीक्षित ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को बताया कि प्राचीन भारतीय समाज ने सदैव प्रकृति और मनुष्य के मध्य गहरे संबंध को समझाते हुए वृक्षों को केवल उपयोगिता की वस्तु नहीं, बल्कि जीवनदाता, देवतुल्य और लोककल्याणकारी माना। पुराणों में पीपल, वट, अशोक, बेल, आंवला और नीम जैसे वृक्षों के रोपण को विशेष पुण्यदायी माना गया है।

इस अवसर पर विभागाध्यक्ष डॉ. मेघना शर्मा ने कहा कि इतिहास में मौर्यकालीन शिलालेखों और स्तंभलेखों में सड़कों के किनारे छायादार वृक्ष लगवाए जाने , यात्रियों के लिए कुएँ खुदवाए जाने तथा औषधीय पौधों के रोपण की व्यवस्था कराये जाने के उल्लेख मिलते है। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में अवैध कटाई तथा वन संपदा के दुरुपयोग के लिए दंड का भी उल्लेख मिलता है।

पीपल को विष्णु, वट को ब्रह्मा तथा तुलसी को लक्ष्मी का स्वरूप माना गया। डॉ. शर्मा ने आगे कहा कि नवप्रवेशित विद्यार्थियों को संस्थान से भावनात्मक रूप से जोड़ने के प्रयोजन हेतु ये आयोजन रखा गया है।

पौधारोपण कार्यक्रम में विभाग के अतिथि शिक्षक डॉ. मुकेश हर्ष, डॉ. गोपाल व्यास, रिंकू जोशी, भगवान दास सुथार, डॉ. संजना चौधरी, और सुशीला बिश्नोई शामिल रहे। बजरंग कलवानी व उमेश पुरोहित का सहयोग रहा। विद्यार्थी वर्ग से कार्तिक शर्मा, सोहनलाल कुम्हार, ट्विंकल बीका, भीखाराम सुथार, गरिमा व्यास, अजीत सियाग, मूमल कँवर, अरविन्द सिंह भाटी, नेहा सलमान, तुषार गहलोत आदि ने विभाग का प्रतिनिधित्व किया।