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आवारा कुत्तों के मामले में दिए निर्देशों की पालना रिपोर्ट एक सप्ताह में करें पेश- हाईकोर्ट

जयपुर, 03 अगस्त । राजस्थान हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से आवारा कुत्तों को लेकर जारी किए गए दिशा-निर्देशों पर लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान मामले में निर्देशों के पालन के लिए राज्य सरकार को एक सप्ताह का समय दिया है।

जस्टिस इन्द्रजीत सिंह व जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार ने अदालती आदेशों की पालना के लिए एक सप्ताह का समय मांगा। वहीं न्यायमित्र अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल ने कहा कि अदालत ने आवारा कुत्तों को बस स्टैंड व रोड सहित अन्य सार्वजनिक जगहों से हटाने के लिए कहा था। इसके साथ ही एंटी रेबीज टीके पर भी शपथ पत्र देने का निर्देश दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि कुत्तों के काटने की घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए जाने चाहिए। ये घटनाएं इंसानों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की जान के लिए खतरा बन सकती हैं। इसलिए राज्य अधिकारी और राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण, नगर निगम और पशु चिकित्सा विभाग के साथ मिलकर, जमीनी स्तर पर ऐसी स्थितियों से निपटने के तरीकों के बारे में लोगों को जागरूक करने और निगरानी रखने के लिए कदम उठाए। खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वे इंसानों की जान के लिए खतरा बन सकने वाले कुत्तों सहित सभी पालतू जानवरों का उचित पंजीकरण सुनिश्चित करें और इसके लिए एक समय-सीमा तय करें और पंजीकरण न कराने पर जुर्माने जैसे दंड का प्रावधान भी करें। इसके बावजूद भी राज्य सरकार ने इन निर्देशों की पालना नहीं की है। न्यायमित्र का पक्ष जानने के बाद खंडपीठ ने राज्य सरकार को अदालती आदेशों का पालन करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है।