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मैकाले की गुलामी वाली शिक्षा से मुक्ति का मार्ग है भारतीय शिक्षा बोर्ड : रामदेव

हरिद्वार, 25 जून । भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कारों और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय शिक्षा बोर्ड (बीएसबी) द्वारा हरिद्वार जोन के शिक्षकों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रशिक्षण सत्रों का समापन हो गया। इस अवसर पर योगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत को औपनिवेशिक मानसिकता और मैकाले की शिक्षा व्यवस्था से वास्तविक मुक्ति दिलाने का मार्ग भारतीय शिक्षा बोर्ड जैसी शिक्षा प्रणाली से होकर गुजरता है, जिसमें शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

कन्या गुरुकुल हरिद्वार में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तराखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, असम, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश से आए 250 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया। प्रशिक्षण का पहला चरण 20 और 21 जून को कक्षा 1 से 5 तक के शिक्षकों के लिए तथा दूसरा चरण 23 और 24 जून को कक्षा 6 से 8 तक के शिक्षकों के लिए आयोजित किया गया। भारतीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एन.पी. सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को कौशल आधारित शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के समन्वय की जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना चाहता है जो भविष्य में राष्ट्र निर्माण के सशक्त वाहक बनें और विकसित एवं वैभवशाली भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। प्रशिक्षण शिविर के समापन पर शिक्षकों को संबोधित करते हुए स्वामी रामदेव ने कहा कि राष्ट्र और समाज के निर्माण में शिक्षक की भूमिका सबसे निर्णायक होती है। शिक्षक ही आने वाली पीढ़ियों की सोच, संस्कार और व्यक्तित्व की नींव रखते हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय शिक्षा बोर्ड की शिक्षा व्यवस्था विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें भारतीय संस्कृति, नैतिकता, कौशल और राष्ट्रभावना से भी जोड़ती है। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान हिंदी, अंग्रेजी, बाल वाटिका, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत तथा ‘द वर्ल्ड अराउंड अस’ विषयों पर विशेषज्ञ रिसोर्स पर्सन्स ने शिक्षकों को विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया।