बीएचयू के कृषि वैज्ञानिकों ने सिक्किम के किसानों को दी टिकाऊ खेती की ट्रेनिंग
वाराणसी, 15 जून । काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के कृषि वैज्ञानिकों ने सिक्किम के नंदोक और डेंटम ब्लॉक में किसानों को टिकाऊ एवं जैविक खेती की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया। इस दौरान किसानों के साथ प्राकृतिक कृषि मिशन, आय वृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और सतत कृषि विकास जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय हिमालयी अध्ययन मिशन (एनएमएचएस) के अंतर्गत पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी), भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित परियोजना का हिस्सा है। परियोजना के तहत बीएचयू के पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जय प्रकाश वर्मा तथा सह-अन्वेषक डॉ. विजय शंकर सिंह, सिक्किम विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के सहयोग से राज्य के विभिन्न जिलों में जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं।
बीएचयू के जनसंपर्क कार्यालय ने सोमवार को यह जानकारी दी। बताया गया कि परियोजना का मुख्य उद्देश्य जैविक एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के माध्यम से फसल उत्पादकता तथा मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना है। इसके लिए वैज्ञानिकों ने स्थानीय राइजोस्फीयर मिट्टी से लाभकारी सूक्ष्मजीवों की पहचान कर एक विशेष ‘प्रोबायोटिक कंसोर्टियम’ विकसित किया है।
यह कंसोर्टियम सिक्किम के डेंटम, उत्तरे, बेघा और नंदोक गांवों की मिट्टी से पृथक किए गए सूक्ष्मजीवों के व्यापक अध्ययन और परीक्षण के बाद तैयार किया गया है। वैज्ञानिकों ने इन उपभेदों का जैव-रासायनिक एवं आणविक स्तर पर विश्लेषण कर नाइट्रोजन स्थिरीकरण, फॉस्फेट, पोटाश और जिंक घुलनशीलता, अमोनिया उत्पादन, पौध वृद्धि हार्मोन (आईएए) निर्माण, साइडरोफोर उत्पादन तथा जैव-नियंत्रण क्षमता जैसे गुणों का मूल्यांकन किया।
अध्ययन के बाद चयनित सूक्ष्मजीव उपभेदों—स्यूडोमोनास, बैसिलस, पैनीबैसिलस, एंटरोबैक्टर, ब्रेवुंडिमोनास, एज़ोटोबैक्टर और एक्सिगुओबैक्टीरियम—को मिलाकर तैयार किए गए प्रोबायोटिक कंसोर्टियम को किसानों के बीच वितरित भी किया गया। डॉ. वर्मा और डॉ. सिंह के नेतृत्व वाली अनुसंधान टीम के अनुसार, इस जैविक उत्पाद ने फसल वृद्धि, बायोमास संचयन, पोषक तत्वों के अवशोषण, अनाज उत्पादन और मिट्टी के समग्र स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार की क्षमता दिखाई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे उत्पादित पोषक तत्वों से भरपूर खाद्यान्न मानव स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होंगे तथा एनीमिया, गठिया और तंत्रिका संबंधी विकारों जैसी समस्याओं से निपटने में मदद मिल सकती है। उन्होंने बताया कि यह तकनीक बाहरी कृषि आदानों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ सिक्किम के पूर्ण जैविक कृषि राज्य बनने के लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगी।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में पासंग आर. शेरपा, छविलाल शर्मा, तुला राम बारिली, निर्जला छेत्री, दिल कुमार बस्नेत, दिल माया प्रधान, निम शेरिंग लेप्चा और खारा बीडीआर सहित बड़ी संख्या में स्थानीय किसानों ने भाग लिया।









