नेपाल की नई सरकार पर अमेरिकी संसद की रिपोर्ट में भू-राजनीतिक चुनौतियों का उल्लेख
काठमांडू, 14 अप्रैल । नेपाल की राजनीति में पुरानी और स्थापित शक्तियों को किनारे करते हुए उभरे नए राजनीतिक नेतृत्व और सत्ता समीकरण को लेकर अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की शोध इकाई कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। इस रिपोर्ट में चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव से लेकर नेपाल में रह रहे तिब्बती शरणार्थियों के मामले का उल्लेख किया गया है।
‘नेपाल का संसदीय चुनाव’ शीर्षक वाली यह रिपोर्ट 31 मार्च को प्रकाशित की गई है, जिसमें काठमांडू के पूर्व स्वतंत्र मेयर बालेन्द्र शाह और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के बीच गठजोड़ को गहरी वैचारिक एकता के बजाय ‘मैरेज ऑफ कन्वीनियंस’ यानी परिस्थितिजन्य समझौता बताया गया है। अमेरिकी रिपोर्ट में नेपाल की हालिया आंतरिक राजनीतिक संक्रमण, जेनजी विद्रोह, भू-राजनीतिक चुनौतियों और उनसे बने नए सत्ता समीकरण पर विस्तार से चर्चा की गई है। रिपोर्ट में उनके मेयर कार्यकाल को मिश्रित प्रदर्शन वाला बताते हुए नीतिगत स्पष्टता की कमी की ओर भी संकेत किया गया है।
हालांकि, गठबंधन सफल होकर सरकार बन गई है, लेकिन रिपोर्ट ने इसके भविष्य को लेकर आशंका भी व्यक्त की है। इसमें कहा गया है कि आने वाले समय में बालेन्द्र शाह और आरएसपी नेतृत्व के बीच संभावित तनाव नई सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बालेन्द्र शाह पारंपरिक मीडिया के बजाय सोशल मीडिया के माध्यम से अपने विचार अधिक साझा करते हैं। इसमें यह भी उल्लेख है कि सितंबर, 2025 की हिंसक घटनाओं में जवाबदेही सुनिश्चित करने और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाने में शाह की भूमिका सरकार के प्रति जनमत को प्रभावित कर सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नेपाल की नई सरकार को उच्च युवा बेरोजगारी, खाड़ी देशों से लौट रहे प्रवासी श्रमिक, ईरान युद्ध के कारण रेमिटेंस में संभावित कमी और ऊर्जा संकट जैसी आर्थिक एवं भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
नई सरकार के 100 सूत्रीय सुधार योजना लाने का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि अब भ्रष्टाचार से निपटने और सितंबर आंदोलन की हिंसा पर जवाबदेही तय करने के मुद्दे पर सरकार की परीक्षा होगी। विदेश नीति के संदर्भ में रिपोर्ट में कहा गया है कि शाह का दृष्टिकोण ‘व्यावहारिक और राष्ट्रीय हित केंद्रित’ हो सकता है। नई सरकार ने ‘संतुलित और स्वतंत्र’ विकास कूटनीति की बात की है, हालांकि चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजनाओं पर इसका प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि नेपाल ने अपने दो बड़े पड़ोसी भारत और चीन के साथ-साथ अमेरिका के साथ भी संतुलित संबंध बनाए रखे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि शाह की विदेश नीति व्यावहारिक होगी, जबकि अन्य के अनुसार यह अभी स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट में अमेरिका की दो प्रमुख चिंताओं का भी उल्लेख किया गया है। पहला— डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने 2025 में नेपाल के लिए 32.9 करोड़ डॉलर की सहायता और एमसीसी परियोजना को रोक दिया था। हालांकि फरवरी 2025 में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने एमसीसी को जारी रखते हुए नवंबर में इसमें 5 करोड़ डॉलर की अतिरिक्त सहायता दी।
दूसरा— अमेरिका तिब्बती शरणार्थियों को आर्थिक सहायता (आगामी वर्ष के लिए 1.3 करोड़ डॉलर) दे रहा है, जबकि चीन पर आरोप है कि वह नेपाल में रह रहे तिब्बतियों की अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता पर नियंत्रण के लिए नेपाल सरकार पर दबाव बना रहा है।









